पटना | 13 जनवरी 2026
बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति का नाम आते ही जिस आयोजन की सबसे पहले चर्चा होती थी, वह इस वर्ष इतिहास बनता नजर आ रहा है। दही-चूड़ा भोज की परंपरा की शुरुआत करने वाले राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव इस बार खुद ही इस आयोजन से दूर रहेंगे। सूत्रों के अनुसार, 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी आवास पर मकर संक्रांति के अवसर पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन नहीं किया जाएगा।
वर्षों तक यह आयोजन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में शक्ति प्रदर्शन, सियासी मेल-जोल और समीकरणों की झलक दिखाने वाला मंच रहा है। मकर संक्रांति के दिन लालू यादव के आवास के बाहर दो दिनों तक समर्थकों, नेताओं और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ती थी। बिहार के कोने-कोने से लोग पटना पहुंचते थे और राबड़ी आवास के बाहर किसी मेले जैसा माहौल नजर आता था।
परंपरा जिसने राजनीति को दी नई पहचान
दही-चूड़ा भोज को लालू यादव ने सामाजिक समरसता और राजनीतिक एकजुटता के प्रतीक के रूप में स्थापित किया था। इस आयोजन में केवल राजद नेता ही नहीं, बल्कि विरोधी दलों के नेता, मंत्री, सांसद और कभी-कभी मुख्यमंत्री तक शिरकत करते रहे हैं। कई बार इसे बिहार की राजनीति की दिशा तय करने वाला मंच भी माना गया।
इस बार क्यों नहीं होगा आयोजन
राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने स्पष्ट किया है कि इस बार मकर संक्रांति पर लालू-राबड़ी आवास में दही-चूड़ा भोज आयोजित नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह जानकारी राबड़ी देवी के सरकारी आवास पर लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से मुलाकात के बाद दी। इसके साथ ही वर्षों से चली आ रही परंपरा के एक बार फिर टूटने की पुष्टि हो गई।
पहले भी कई बार टूटी है परंपरा
हालांकि यह पहली बार नहीं है जब लालू यादव के आवास पर दही-चूड़ा भोज नहीं हो रहा है।
2018 में चारा घोटाले में सजा और जेल में रहने के कारण आयोजन रद्द हुआ।
2019 और 2020 में भी लालू यादव की अनुपस्थिति और स्वास्थ्य कारणों से भोज नहीं हुआ।
2021 और 2022 में कोरोना महामारी के चलते सार्वजनिक आयोजन टाल दिया गया।
2023 में तैयारी पूरी होने के बावजूद शरद यादव के निधन के कारण अंतिम समय में आयोजन रद्द करना पड़ा।
हालांकि 2024 और 2025 में यह परंपरा फिर जीवित हुई, लेकिन 2026 में एक बार फिर आयोजन नहीं हो रहा है।
सियासत का रंग फिर भी रहेगा बरकरार
लालू यादव के आवास पर भोज नहीं होने के बावजूद मकर संक्रांति का राजनीतिक रंग फीका नहीं पड़ेगा। राजद प्रमुख के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजप्रताप यादव इस वर्ष भव्य दही-चूड़ा भोज का आयोजन कर रहे हैं। 14 जनवरी को पटना में होने वाले इस आयोजन में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, मंत्री, विधानसभा और विधान परिषद के अध्यक्षों सहित कई दलों के नेताओं को आमंत्रित किया गया है।
सियासी संकेत भी दे रहा है फैसला
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लालू यादव द्वारा दही-चूड़ा भोज नहीं कराना केवल एक आयोजन का रद्द होना नहीं, बल्कि बदलते राजनीतिक हालात और नई पीढ़ी के नेतृत्व की ओर संकेत भी हो सकता है। एक दौर में जिस राबड़ी आवास की रौनक बिहार की राजनीति की धड़कन मानी जाती थी, वहां इस बार मकर संक्रांति के दिन सन्नाटा पसरा रहेगा।