पटना | राज्य डेस्क:बिहार सरकार ने बुज़ुर्गों की सुविधा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए जमीन और फ्लैट की रजिस्ट्री प्रक्रिया में एक ऐतिहासिक बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को संपत्ति निबंधन के लिए सरकारी दफ़्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। ज़रूरत पड़ने पर सरकार स्वयं उनके घर पहुंचकर रजिस्ट्री से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी कराएगी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को इस नई पहल की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की। उन्होंने बताया कि यह सुविधा 1 अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में लागू की जाएगी। इस व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री की प्रक्रिया को न सिर्फ़ सरल बनाया गया है, बल्कि इसे पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी भी किया गया है।
यह सेवा मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अधीन संचालित की जाएगी। विभाग की ओर से विशेष रूप से गठित चलंत निबंधन इकाई (मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट) वरिष्ठ नागरिकों के घर जाकर दस्तावेजों का सत्यापन, पंजीकरण और अन्य कानूनी औपचारिकताएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी करेगी। लाभार्थी को केवल ऑनलाइन आवेदन करना होगा, इसके बाद विभागीय टीम स्वयं संपर्क कर प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।
सरकार ने इस योजना को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आम जनता से सुझाव भी आमंत्रित किए हैं। इच्छुक लोग 19 जनवरी तक क्यूआर कोड स्कैन कर अपने सुझाव भेज सकते हैं। इसके अलावा लिखित सुझाव अपर सचिव, 4 देश र मार्ग, मुख्यमंत्री सचिवालय, पटना–800001 के पते पर या ईमेल के माध्यम से cm-secretariat-bih@gov.in पर भी भेजे जा सकते हैं।
सरकार के इस फैसले के पीछे बुज़ुर्गों को होने वाली व्यावहारिक परेशानियों को कम करना मुख्य उद्देश्य है। अब तक रजिस्ट्री के दौरान उम्र और शारीरिक असमर्थता के कारण कई वरिष्ठ नागरिकों को दलालों के भरोसे रहना पड़ता था, जिससे धोखाधड़ी और विवाद की आशंका बनी रहती थी। नई व्यवस्था से न केवल यह जोखिम घटेगा, बल्कि संपत्ति लेन-देन की प्रक्रिया अधिक भरोसेमंद बनेगी।
मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट के ज़रिए जमीन और फ्लैट से संबंधित दस्तावेज़ों का डिजिटलीकरण, अद्यतन जानकारी और समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाएगा। इससे संपत्ति विवादों में कमी आने की उम्मीद है और खरीद–फरोख्त के मामलों में स्पष्टता बढ़ेगी।
सरकार इसे डिजिटल ईज ऑफ लिविंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रही है। यह निर्णय 7 निश्चय–3 के अंतर्गत शामिल सातवें निश्चय “सबका सम्मान, जीवन आसान” के तहत लिया गया है। सरकार का दावा है कि इस निश्चय के तहत अब तक लिए गए फैसलों का सीधा लाभ आम लोगों, विशेषकर बुज़ुर्गों और असहाय वर्ग को मिल रहा है। यह पहल बिहार को सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।