समस्तीपुर।जिले की कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत तथा प्रशासनिक कार्यप्रणाली को सुगम बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। रोसड़ा अनुमंडल पुलिस कार्यालय के अत्यधिक विस्तृत क्षेत्र को देखते हुए इसके पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। योजना के तहत रोसड़ा पुलिस अनुमंडल को दो हिस्सों में विभाजित कर एक नया अनुमंडल गठित किया जाएगा, जिसे रोसड़ा एसडीपीओ-2 नाम दिया जा सकता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नए अनुमंडल का संभावित मुख्यालय हसनपुर में बनाए जाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। जिला पुलिस की ओर से इससे संबंधित प्रस्ताव उच्च मुख्यालय को भेज दिया गया है और जल्द ही स्वीकृति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
बड़ा क्षेत्र, बढ़ता दबाव बना वजह
बताया जा रहा है कि जिले के पूर्वी हिस्से में स्थित रोसड़ा पुलिस अनुमंडल का भौगोलिक क्षेत्र काफी बड़ा है, जिससे अनुमंडल स्तर के पदाधिकारियों पर कार्यभार अधिक बढ़ गया है। क्षेत्र को पूर्वी और पश्चिमी हिस्से में बांटने से न केवल प्रशासनिक संतुलन बनेगा, बल्कि पुलिस अधिकारियों को भी क्षेत्रीय निगरानी और अपराध नियंत्रण में सुविधा होगी।
हसनपुर क्यों माना जा रहा है उपयुक्त?
रोसड़ा के बाद हसनपुर को नया अनुमंडल मुख्यालय बनाने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान माना जा रहा है। हालांकि, अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है। इससे पहले भी जिले में सदर अनुमंडल को विभाजित कर नया अनुमंडल बनाया गया था, जिसका मुख्यालय कल्याणपुर में स्थापित किया गया है। उसी तर्ज पर अब रोसड़ा अनुमंडल का पुनर्गठन किया जा रहा है।
पुलिस अंचलों की संख्या में बड़ा इजाफा
पुनर्गठन के तहत जिले में पुलिस अंचलों की संख्या में भी ऐतिहासिक बढ़ोतरी की तैयारी है। वर्तमान में जहां जिले में केवल 5 पुलिस अंचल हैं, वहीं प्रस्तावित नए ढांचे में इनकी संख्या बढ़कर 14 हो जाएगी। इसके साथ ही एक नया पुलिस अनुमंडल भी अस्तित्व में आएगा।
मौजूदा पुलिस अंचलों—सदर, मुफस्सिल, दलसिंहसराय, रोसड़ा और पटोरी—के अलावा अब ताजपुर, मुसरीघरारी, उजियारपुर, कल्याणपुर, वारिसनगर, मोहिउद्दीननगर, विद्यापतिनगर, विभूतिपुर और हसनपुर को नए पुलिस अंचल के रूप में विकसित किया जाएगा।
थानों की कार्यप्रणाली में भी होगा बदलाव
नए पुलिस अंचलों के गठन के साथ ही इन क्षेत्रों के थानों को पुलिस निरीक्षक थाना में परिवर्तित किया जाएगा। इसके बाद इन थानों की कमान निरीक्षक रैंक के अधिकारियों को सौंपी जाएगी, जिससे जांच की गुणवत्ता और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होगा।
पुनर्गठन से क्या होंगे फायदे?
इस पुनर्गठन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक पुलिस अंचल का क्षेत्रफल, थाना संख्या और जनसंख्या संतुलित रहे। इससे पुलिस अधिकारियों पर अनावश्यक बोझ नहीं पड़ेगा और आम जनता को त्वरित सुरक्षा व न्याय मिल सकेगा।
नए ढांचे के तहत अपराध नियंत्रण, गश्ती व्यवस्था, अनुसंधान और शिकायत निवारण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।
लंबे समय बाद हो रहा बड़ा बदलाव
गौरतलब है कि यह पुनर्गठन कई वर्षों बाद किया जा रहा है। इस दौरान जिले के कई इलाकों में आबादी और शहरी विस्तार तेजी से बढ़ा है, लेकिन पुलिस अंचल और थानों की संरचना पहले जैसी ही बनी हुई थी। अब यह बदलाव क्षेत्रीय जरूरतों के अनुरूप पुलिस व्यवस्था को आधुनिक और सशक्त बनाएगा।