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मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में BIRSAC परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा, डेटा आधारित शासन को और सशक्त करने पर जोर

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पटना | बिहार में तकनीक आधारित सुशासन और विकास योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग को और मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (BIRSAC) द्वारा संचालित विभिन्न परियोजनाओं की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य सरकार के कई अहम विभागों के शीर्ष अधिकारी उपस्थित रहे और BIRSAC की वर्तमान गतिविधियों, उपलब्धियों तथा भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में विकास आयुक्त श्री मिहिर कुमार सिंह, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, बिहार की सचिव डॉ. प्रतिमा, साथ ही विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव एवं सचिव स्तर के पदाधिकारी शामिल हुए। इससे बैठक के महत्व और राज्य सरकार की प्राथमिकताओं का स्पष्ट संकेत मिलता है।

BIRSAC की भूमिका पर विस्तार से चर्चा

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि BIRSAC राज्य में भू-स्थानिक तकनीक (Geospatial Technology), सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग और GIS आधारित योजनाओं की रीढ़ बन चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपदा प्रबंधन, शहरी एवं ग्रामीण विकास, कृषि, जल संसाधन, पर्यावरण संरक्षण और भूमि प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में BIRSAC की भूमिका दिन-ब-दिन और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।
मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि डेटा आधारित निर्णय (Data Driven Decision Making) आज के समय की आवश्यकता है और BIRSAC द्वारा उपलब्ध कराए गए वैज्ञानिक व तकनीकी इनपुट से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ी है।

विभागीय समन्वय बढ़ाने के निर्देश

बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा BIRSAC के सहयोग से चल रही परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि सभी विभाग BIRSAC के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करें, ताकि उपग्रह आधारित आंकड़ों का अधिकतम उपयोग हो सके और योजनाओं के परिणाम जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखें।
उन्होंने यह भी कहा कि कई विभागों में उपलब्ध आंकड़ों का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है, जिसे दूर करने के लिए तकनीकी प्रशिक्षण और नियमित समीक्षा आवश्यक है।

विकास आयुक्त का फोकस:

योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन
विकास आयुक्त श्री मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि BIRSAC के माध्यम से योजनाओं की निगरानी (Monitoring) और मूल्यांकन (Evaluation) को और अधिक वैज्ञानिक बनाया जा सकता है। इससे न केवल समय पर परियोजनाओं की प्रगति का आकलन होगा, बल्कि संभावित समस्याओं की पहचान भी पहले ही हो सकेगी।
उन्होंने सुझाव दिया कि बड़े पैमाने की आधारभूत संरचना परियोजनाओं, जैसे सड़क, पुल, सिंचाई और शहरी विकास योजनाओं में GIS आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम को अनिवार्य रूप से अपनाया जाए।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की भूमिका

विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की सचिव डॉ. प्रतिमा ने BIRSAC की तकनीकी क्षमताओं, मानव संसाधन विकास और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है कि नई तकनीकों, सॉफ्टवेयर अपग्रेड और विशेषज्ञ प्रशिक्षण के माध्यम से BIRSAC को और सशक्त बनाया जाए।
डॉ. प्रतिमा ने यह भी बताया कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और बिग डेटा एनालिटिक्स को भी BIRSAC की कार्यप्रणाली से जोड़े जाने की योजना है, जिससे निर्णय प्रक्रिया और अधिक सटीक हो सके।

विभिन्न विभागों की प्रस्तुतियाँ

बैठक के दौरान कई विभागों ने अपने-अपने क्षेत्रों में BIRSAC के सहयोग से चल रही परियोजनाओं की प्रस्तुति दी। इनमें भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन, आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली, बाढ़ निगरानी, फसल आकलन, जल निकायों की मैपिंग और शहरी नियोजन से जुड़ी परियोजनाएं प्रमुख रहीं।
अपर मुख्य सचिवों और प्रधान सचिवों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि BIRSAC के तकनीकी सहयोग से नीतिगत निर्णयों में स्पष्टता आई है और योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार हुआ है।

मुख्य सचिव के सख्त निर्देश

बैठक के अंत में मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत ने निर्देश दिया कि:
BIRSAC द्वारा संचालित सभी परियोजनाओं की नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाए
तकनीकी रिपोर्ट को केवल कागजों तक सीमित न रखकर नीतिगत फैसलों से जोड़ा जाए
जिला स्तर तक GIS और रिमोट सेंसिंग आधारित सिस्टम का विस्तार किया जाए
समयबद्ध ढंग से परियोजनाओं को पूरा कर आम जनता को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जाए
उन्होंने यह भी कहा कि बिहार सरकार का लक्ष्य है कि राज्य को तकनीक आधारित, पारदर्शी और उत्तरदायी प्रशासन का मॉडल बनाया जाए, जिसमें BIRSAC की भूमिका केंद्रीय होगी।बता दें कि 
यह समीक्षा बैठक स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि बिहार सरकार आधुनिक तकनीक के माध्यम से विकास योजनाओं को नई दिशा देने के लिए गंभीर और प्रतिबद्ध है। BIRSAC के जरिए भू-स्थानिक तकनीक का बेहतर उपयोग न केवल सरकारी योजनाओं की गुणवत्ता बढ़ाएगा, बल्कि राज्य के समग्र विकास को भी गति प्रदान करेगा।

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