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ताजपुर में घूसखोरी का आरोप: वीडियो वायरल फिर भी कार्रवाई शून्य, सिविल प्रशासन पर उठे सवाल

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समस्तीपुर : ताजपुर अंचल के राजस्व कर्मचारी रॉबिन ज्योति पर घूस लेने का गंभीर आरोप सामने आने के बाद भी अब तक कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कर्मचारी को दाखिल–खारिज और खाता–खेसरा ठीक करने के एवज में रिश्वत मांगते और लेते हुए स्पष्ट रूप से सुना–देखा जा सकता है। बावजूद इसके सिविल प्रशासन की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।सी.पी.आई. (एम.एल.) माले के ताजपुर प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने जिलाधिकारी को पत्र देकर मामले की उच्चस्तरीय जांच और आरोपी कर्मचारी की बर्खास्तगी की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह वीडियो शत-प्रतिशत सही है और इससे यह साबित होता है कि अंचल कार्यालय में भ्रष्टाचार संगठित रूप ले चुका है। गरीब किसानों से जमीन संबंधी कामों के लिए खुलेआम पैसा वसूला जा रहा है।

पुलिस बनाम सिविल प्रशासन की कार्यशैली पर चर्चा

सुरेंद्र प्रसाद सिंह का कहना है कि समसतीपुर में यह अक्सर देखा गया है कि पुलिस प्रशासन से जुड़े मामलों में पुलिस अधीक्षक अरविंद प्रताप सिंह तुरंत संज्ञान लेकर कड़ी कार्रवाई करते हैं। पुलिस द्वारा प्रताड़ना, रिश्वतखोरी या किसी भी प्रकार की अनियमितता उजागर होने पर त्वरित जांच, निलंबन और प्राथमिकी जैसी कार्रवाई देखने को मिलती है।लेकिन दूसरी ओर, जब मामला सिविल प्रशासन से जुड़ा होता है—चाहे वह अंचल, राजस्व या अन्य विभागों का हो—तो कार्रवाई महीनों तक ठंडे बस्ते में चली जाती है। ताजपुर के इस मामले में भी एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद न तो जांच कमिटी बनी और न ही आरोपी कर्मचारी के विरुद्ध कोई विभागीय कदम उठाया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यही मामला पुलिस विभाग से जुड़ा होता, तो अब तक बड़ी कार्रवाई हो चुकी होती। सिविल प्रशासन की यह ढिलाई भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसी है।
आंदोलन की चेतावनी

माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि अविलंब कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी अन्य संगठनों के साथ मिलकर मानव श्रृंखला और जन आंदोलन करेगी। 15 जनवरी को ताजपुर चौक पर विरोध कार्यक्रम की घोषणा की गई है।उन्होंने कहा—“सुशासन की बात करने वाली सरकार में गरीबों से खुलेआम रिश्वत ली जा रही है। पुलिस प्रशासन जहां तुरंत एक्शन लेता है, वहीं सिविल प्रशासन चुप्पी साध लेता है। यह दोहरी नीति बर्दाश्त नहीं होगी।”मामले की प्रतिलिपि एसडीओ समस्तीपुर को भी भेजी गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन जनता के भरोसे को कायम रखने के लिए क्या कदम उठाता है।

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