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रेलवे टेंडर मामले में राबड़ी देवी की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई से मांगा जवाब

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नई दिल्ली।रेलवे टेंडर से जुड़े कथित घोटाले के मामले में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को दिल्ली हाईकोर्ट से आंशिक राहत मिली है। ट्रायल कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ आरोप तय किए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ कर रही है।
इससे पहले इसी प्रकरण में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की याचिकाओं पर भी हाईकोर्ट सीबीआई से जवाब मांग चुका है। तीनों ने राऊज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार से संबंधित धाराओं में आरोप तय किए गए थे।

ट्रायल कोर्ट ने तय किए थे गंभीर आरोप

विशेष अदालत ने लालू परिवार के तीनों प्रमुख सदस्यों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी सहित भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धाराओं के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया था। अदालत का मानना था कि प्रथम दृष्टया ऐसे पर्याप्त तथ्य मौजूद हैं, जिनके आधार पर मुकदमा आगे बढ़ाया जा सकता है।

बचाव पक्ष ने उठाए कानूनी सवाल

ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान लालू यादव के वकीलों ने दलील दी थी कि अभियोजन की अनुमति ही संदेह के घेरे में है। उनका कहना था कि सीबीआई पहले यह कह चुकी थी कि मुकदमा चलाने के लिए अनुमति की जरूरत नहीं है, लेकिन बाद में अनुमति मिलने की बात कही गई, जो कानूनन सही नहीं है।
वहीं सीबीआई ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त दस्तावेजी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य मौजूद हैं, जिनके आधार पर मुकदमा चलाया जाना जरूरी है।

पहले मिल चुकी है जमानत

इस मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण में 2019 में ही लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को नियमित जमानत मिल चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज केस में अदालत ने एक–एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर राहत दी थी। ईडी की चार्जशीट में कुल 16 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें कई कंपनियां और कारोबारी भी शामिल हैं।

क्या है पूरा मामला

आरोप है कि लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहते हुए रांची और पुरी स्थित रेलवे के दो होटलों के संचालन का ठेका नियमों को दरकिनार कर एक निजी कंपनी को दे दिया गया। बदले में पटना में कीमती जमीन हासिल करने का आरोप है। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह पूरा लेन–देन आपराधिक साजिश के तहत किया गया था।फिलहाल हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है और सीबीआई के जवाब के बाद आगे की सुनवाई तय होगी।

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