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सीतामढ़ी में दर्दनाक हादसा: तेज रफ्तार पिकअप की टक्कर से छात्र की मौत, मछली लूटती भीड़ ने इंसानियत को किया शर्मसार

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सीतामढ़ी/पुपरी।सीतामढ़ी जिले के पुपरी इलाके से एक ऐसा हृदयविदारक मामला सामने आया है, जिसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। झझी–हट गांव के समीप तेज रफ्तार पिकअप वाहन की चपेट में आने से सातवीं कक्षा के छात्र रितेश कुमार उर्फ गोलू की मौके पर ही मौत हो गई। लेकिन इस दर्दनाक हादसे के बाद जो दृश्य दिखा, उसने मानवीय संवेदनाओं पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया—लोग मदद के बजाय सड़क पर गिरी मछलियां लूटने में जुट गए।

कोचिंग जाते समय हुआ हादसा

मृतक छात्र रितेश, संतोष दास का पुत्र था और रोज की तरह सुबह कोचिंग जाने के लिए घर से निकला था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मछली लदा पिकअप वाहन तेज गति से आ रहा था। अनियंत्रित वाहन ने रितेश को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उसकी घटनास्थल पर ही जान चली गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि आसपास के लोग सन्न रह गए।
कुछ ही देर में परिजन मौके पर पहुंचे। मां–बाप का करुण क्रंदन पूरे माहौल को गमगीन कर गया। परिवार के सपनों का एकलौता सहारा पलभर में उनसे छिन चुका था।

दर्द के बीच संवेदनहीनता का दृश्य

एक ओर जहां परिवार अपने बच्चे के शव से लिपटकर रो रहा था, वहीं दूसरी ओर भीड़ का एक हिस्सा इंसानियत भूल चुका था। सड़क पर बिखरी मछलियों को लोग बोरी और झोले में भरने लगे। कोई हाथों में समेटकर भाग रहा था तो कोई पिकअप के आसपास लूट में लगा था। यह दृश्य समाज के नैतिक पतन की भयावह तस्वीर पेश कर रहा था।
स्थानीय लोगों का कहना था कि अगर भीड़ मदद के लिए आगे आती, एंबुलेंस या पुलिस को तुरंत सूचना देती तो शायद स्थिति कुछ अलग होती। लेकिन ज्यादातर लोग तमाशबीन बने रहे।

पुलिस ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही पुपरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने भीड़ को हटाकर स्थिति को नियंत्रित किया और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दुर्घटनाग्रस्त पिकअप वाहन को जब्त कर लिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और चालक की तलाश की जा रही है।

कई सवाल छोड़ गई घटना

यह घटना सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनहीनता की कड़वी सच्चाई भी उजागर करती है। एक होनहार छात्र की जान चली गई, परिवार उजड़ गया, लेकिन कुछ लोगों के लिए वह पल भी लूट का मौका बन गया। स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि ऐसे मामलों में समाज को आत्ममंथन की जरूरत है।
गांव में मातम पसरा है। रितेश के सहपाठी और शिक्षक भी इस घटना से स्तब्ध हैं। सभी की जुबान पर एक ही सवाल है—क्या इंसानियत इतनी सस्ती हो गई है?

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