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वरिष्ठ आईपीएस प्रवीण वशिष्ठ ने लिया स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का निर्णय, बने सतर्कता आयुक्त

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पटना – बिहार कैडर के 1991 बैच के वरिष्ठ एवं अनुभवी आईपीएस अधिकारी प्रवीण वशिष्ठ ने भारतीय पुलिस सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। राज्य सरकार ने उनके आवेदन को स्वीकार करते हुए सेवा नियमों में आवश्यक छूट प्रदान कर सेवानिवृत्ति को स्वीकृति दे दी है। यह निर्णय तब लिया गया, जब हाल ही में उनकी नियुक्ति केंद्रीय सतर्कता आयोग में सतर्कता आयुक्त के प्रतिष्ठित पद पर की गई।
प्रवीण वशिष्ठ लंबे समय से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत थे और गृह मंत्रालय में विशेष सचिव के पद पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे। गृह मंत्रालय की ओर से 16 दिसंबर 2025 को बिहार सरकार को पत्र भेजकर उनके वीआरएस आवेदन पर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया गया था। इसके बाद गृह विभाग ने नियमानुसार तीन माह पूर्व नोटिस की अनिवार्यता में शिथिलता देते हुए उनकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को मंजूरी प्रदान कर दी।
जानकारी के अनुसार डीजी रैंक के अधिकारी प्रवीण वशिष्ठ 31 मई 2026 को नियमित रूप से सेवानिवृत्त होने वाले थे। लेकिन सतर्कता आयुक्त के संवैधानिक पद पर नियुक्ति के बाद उन्होंने सेवा से पूर्व ही अलग होने का निर्णय लिया। प्रशासनिक हलकों में इसे एक स्वाभाविक प्रक्रिया माना जा रहा है, क्योंकि सतर्कता आयोग में नियुक्ति के बाद अधिकारी का पुलिस सेवा से मुक्त होना आवश्यक होता है।
प्रवीण वशिष्ठ का कार्यकाल बेहद उपलब्धियों भरा रहा है। बिहार में विभिन्न जिलों एवं महत्वपूर्ण शाखाओं में तैनाती के दौरान उन्होंने कानून–व्यवस्था को सुदृढ़ करने, संगठित अपराध पर नियंत्रण, पुलिस आधुनिकीकरण तथा प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा देने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान भी उन्होंने आंतरिक सुरक्षा, पुलिस सुधार और नीति निर्धारण से जुड़े कई अहम दायित्व निभाए।
सहकर्मियों के बीच वे एक सख्त लेकिन संवेदनशील अधिकारी के रूप में जाने जाते रहे हैं। जटिल से जटिल परिस्थितियों में संतुलित निर्णय लेने की उनकी क्षमता के कारण उन्हें कई अहम जिम्मेदारियां सौंपी गईं। गृह मंत्रालय में विशेष सचिव रहते हुए उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर नीतिगत कार्य किए।
अब सतर्कता आयुक्त के रूप में उनसे भ्रष्टाचार निरोधक तंत्र को और प्रभावी बनाने, प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करने तथा शिकायत निवारण प्रणाली को गति देने की अपेक्षा की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस एवं प्रशासन का लंबा अनुभव इस नई भूमिका में उनके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
राज्य सरकार द्वारा वीआरएस की स्वीकृति के साथ ही बिहार पुलिस महकमे में एक लंबे और प्रभावशाली अध्याय का समापन हो गया है। वहीं दूसरी ओर केंद्रीय सतर्कता आयोग को एक अनुभवी और दक्ष अधिकारी की सेवाएं प्राप्त हुई हैं, जो देश की निगरानी व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान कर सकते 

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