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भोजपुर के इनामी अपराधी दीपक पांडेय ने रोहतास कोर्ट में किया सरेंडर, पुलिस दबिश का दिखा असर

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रोहतास जिले में पुलिस की सख्ती और लगातार बढ़ते दबाव के बीच भोजपुर के कुख्यात अपराधी दीपक पांडेय ने आखिरकार अनुमंडल व्यवहार न्यायालय, रोहतास में आत्मसमर्पण कर दिया। राज्य सरकार द्वारा उस पर दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था और वह लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर चल रहा था। सरेंडर की यह घटना पुलिस के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है।

कई संगीन मामलों में था वांछित

पुलिस के अनुसार, दीपक पांडेय भोजपुर जिले के तरारी थाना क्षेत्र के भखुरा गांव का निवासी है और उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, रंगदारी, मारपीट तथा आर्म्स एक्ट जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं। आयर कोठा थाना क्षेत्र में धारा 307 के तहत दर्ज एक मामले में वह मुख्य अभियुक्त था। अन्य आरोपी पहले ही न्यायालय के समक्ष पेश हो चुके थे, लेकिन दीपक लगातार फरार चल रहा था।
बताया जाता है कि एक सप्ताह पूर्व अदालत द्वारा उसके खिलाफ कुर्की-जब्ती का आदेश जारी किया गया था। इसी कानूनी दबाव और पुलिस की बढ़ती घेराबंदी के कारण उसने सरेंडर का रास्ता चुना।

वीडियो जारी कर लगाए गंभीर आरोप

आत्मसमर्पण के बाद सोशल मीडिया पर उसका एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें उसने खुद को निर्दोष बताते हुए पुलिस पर फर्जी मुकदमों में फंसाने का आरोप लगाया। उसने दावा किया कि उसके दो भाइयों की हत्या कर दी गई और उस पर भी जानलेवा हमला हुआ था। दीपक ने कहा कि उसने भोजपुर एसपी की पहल पर अदालत में समर्पण किया है और सभी मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की।

न्यायालय के आदेश पर भेजा गया जेल

दीपक पांडेय ने प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी रिचा कश्यप की अदालत में आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद पुलिस ने उसे अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया। डेहरी के एएसपी अतुलेश झा ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि दरीहट थाना में आर्म्स एक्ट के एक मामले में कुर्की वारंट जारी था और लगातार कार्रवाई के चलते आरोपी ने सरेंडर किया।

अपराध नियंत्रण की दिशा में अहम कदम

स्थानीय पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस आत्मसमर्पण से भोजपुर और रोहतास क्षेत्र में सक्रिय आपराधिक गिरोहों पर लगाम लगेगी। इनामी अपराधी का कानून के सामने आना यह दर्शाता है कि पुलिस की रणनीति कारगर साबित हो रही है। हालांकि, आरोपी द्वारा लगाए गए आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की बात कही जा रही है।
कुल मिलाकर यह घटनाक्रम बिहार में अपराध नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। अब पुलिस अन्य लंबित मामलों में पूछताछ कर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

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