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डीआईजी ने परिवीक्ष्यमान डीएसपी के प्रशिक्षण की समीक्षा की, दिए जरूरी निर्देश

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दरभंगा: मिथिला क्षेत्र के पुलिस उप-महानिरीक्षक श्री मनोज तिवारी द्वारा 67वीं बैच के परिवीक्ष्यमान पुलिस उपाधीक्षक श्री रौशन कुमार एवं 68वीं बैच के श्री राकेश कुमार के प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान डीआईजी ने दोनों अधिकारियों के अब तक के कार्यों का मूल्यांकन करते हुए उन्हें पुलिसिंग की व्यावहारिक एवं कानूनी बारीकियों को गहराई से समझने के निर्देश दिए।
नए डीआईजी मनोज तिवारी के पदभार ग्रहण करने के बाद से पुलिस महकमे में सकारात्मक कार्यसंस्कृति का माहौल देखा जा रहा है। उनकी छवि एक अनुशासित, संतुलित और संवेदनशील अधिकारी की रही है। वे लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि पुलिस का व्यवहार आम जनता के प्रति मित्रवत हो, जबकि अपराधियों के प्रति सख्त और कानूनसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अधिकारियों का मानना है कि उनके मार्गदर्शन से मिथिला क्षेत्र में पेशेवर पुलिसिंग को नई दिशा मिल रही है।
समीक्षा के क्रम में डीआईजी ने न्यायालय से जुड़ी प्रक्रियाओं—ई-सम्मन, वारंट, कुर्की-जब्ती—को प्रत्यक्ष रूप से देखकर सीखने का निर्देश दिया। कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था, कोर्ट नायक की भूमिका तथा दस्तावेज संधारण की प्रक्रिया को समझने पर विशेष बल दिया गया। दस वर्षों के निरीक्षण नोट्स का अध्ययन कर प्रशासनिक अनुभव हासिल करने की भी हिदायत दी गई।
अनुसंधान को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाने के लिए साइबर थाना में प्रशिक्षण, डिजिटल साक्ष्य संकलन, ट्रैफिक प्रबंधन, रात्रि गश्ती तथा जेल कार्यप्रणाली को नजदीक से समझने के निर्देश दिए गए। गंभीर कांडों—एससी/एसटी, पोक्सो, हत्या, दुष्कर्म, लूट—की फाइलों का अध्ययन कर विवेचना की बारीकियां सीखने पर जोर दिया गया।
डीआईजी ने स्पष्ट कहा कि एफआईआर लेखन, फर्द बयान, घटनास्थल निरीक्षण और केस डायरी संधारण में पूर्ण पारदर्शिता होनी चाहिए। प्रशिक्षु अधिकारियों को इंस्पेक्टर के साथ फील्ड में जाकर अनुसंधान की प्रक्रिया समझने तथा स्वयं एक-दो गंभीर मामलों का पर्यवेक्षण करने का निर्देश दिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास है। इसलिए हर पदाधिकारी का व्यवहार शालीन, संवेदनशील और निष्पक्ष होना चाहिए। वरीय अधिकारियों से समन्वय, छापेमारी में सहभागिता, कोर्ट की कार्यवाही को समझना और आम लोगों से बेहतर संवाद स्थापित करना एक सफल पुलिस अधिकारी की पहचान है।
समीक्षा के अंत में डीआईजी मनोज तिवारी ने निर्देश दिया कि दिए गए सभी बिंदुओं का नियमित अनुपालन किया जाए और प्रशिक्षण अवधि के अनुभव का प्रतिवेदन तैयार किया जाए, ताकि भविष्य में दक्ष और जनोन्मुख पुलिस नेतृत्व तैयार हो सके।

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