नोएडा में मॉल के बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे में भरे पानी में डूबकर 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद प्रदेश भर में गहरा आक्रोश है। घटना को गंभीर मानते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) लोकेश एम को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है, जिसे पांच दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
एसआईटी में मेरठ के मंडलायुक्त, मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता अजय वर्मा को शामिल किया गया है। जांच दल मंगलवार को नोएडा पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण करेगा और प्राधिकरण के अधिकारियों, बिल्डर प्रतिनिधियों तथा स्थानीय लोगों से पूछताछ करेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां एक मॉल के बेसमेंट निर्माण के लिए गहरा गड्ढा खोदा गया था। कई दिनों से उसमें पानी भरा हुआ था, लेकिन न तो बैरिकेडिंग की गई थी और न ही किसी तरह का चेतावनी बोर्ड लगाया गया था। बताया जा रहा है कि युवराज मेहता उसी रास्ते से गुजर रहे थे और अंधेरे व असुरक्षित स्थिति के कारण गड्ढे में गिर गए। समय पर मदद न मिलने से उनकी डूबकर मौत हो गई।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि लंबे समय तक ठंडे पानी में पड़े रहने से युवराज के फेफड़ों में करीब साढ़े तीन लीटर पानी भर गया था, जिससे ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक गई और दम घुटने से उनकी मौत हो गई। चिकित्सकों के अनुसार शरीर पर अत्यधिक दबाव पड़ने से हार्ट फेलियर की स्थिति भी बनी।
इस घटना ने नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी सामने आई है। प्रशासन ने पहले ही एक जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त कर दिया है, जबकि संबंधित दो बिल्डर कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।
हटाए गए सीईओ लोकेश एम 2005 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। सरकार ने फिलहाल उन्हें प्रतीक्षारत रखा है। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद प्राधिकरण के कई और अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
युवराज मेहता की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने घटना के लिए सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण स्थल पर न्यूनतम सुरक्षा इंतजाम भी होते तो एक युवा की जान बचाई जा सकती थी।
अब पूरे मामले में एसआईटी की रिपोर्ट निर्णायक मानी जा रही है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि दोषी चाहे अधिकारी हों या बिल्डर, किसी को बख्शा नहीं जाएगा और निर्माण स्थलों की सुरक्षा को लेकर नई सख्त गाइडलाइन भी लागू की जाएगी।