ताजपुर/समस्तीपुर | 21 जनवरी 2026
सरकार द्वारा आनन-फानन में लागू की जा रही फार्मर (किसान) रजिस्ट्री में खाता-खेसरा नंबर को अनिवार्य करना किसानों को किसान सम्मान निधि सहित तमाम कृषि योजनाओं से वंचित करने की साज़िश है। यह आरोप अखिल भारतीय किसान महासभा ने लगाया है। महासभा का कहना है कि आगामी दिनों में डीज़ल अनुदान, खाद-बीज सब्सिडी, फसल क्षति मुआवजा, कृषि यंत्रीकरण सहायता जैसी सभी योजनाएं इसी रजिस्ट्री में दर्ज रकबे के आधार पर दी जाएंगी, जिससे बड़ी संख्या में किसान बाहर हो जाएंगे।
यह बातें मोतीपुर (वार्ड-26) में आयोजित महासभा की प्रखंड समिति की विस्तारित बैठक को संबोधित करते हुए जिला सचिव ललन कुमार ने कहीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था किसानों के लिए घातक साबित होगी और सरकार को इसे तत्काल संशोधित करना चाहिए।
बैठक की अध्यक्षता प्रखंड अध्यक्ष ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने की, जबकि संचालन ललन दास ने किया। बैठक में मुंशीलाल राय, संजीव राय, राजदेव प्रसाद सिंह, कैलाश सिंह, मोती लाल सिंह, शंकर महतो, मकसुदन सिंह, अनील सिंह, संजय कुमार सिंह, रंजीत कुमार सिंह, दिनेश प्रसाद सिंह, सुखदेव सिंह, रवींद्र प्रसाद सिंह, राज नारायण राय, सत्तो सहनी, आनंदलाल सहनी, अनील कुमार राय, धर्मेंद्र कुमार राय, मनीष कुमार राय, चंद्रशेखर शर्मा, रवींद्र शर्मा, लखन राय सहित बड़ी संख्या में किसानों ने अपनी बातें रखीं।
जमाबंदी की उलझनें, किसानों पर संकट
अध्यक्षीय संबोधन में ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने कहा कि अधिकांश किसानों के पास एक से अधिक जमाबंदी है। ऑनलाइन रिकॉर्ड में कई जमाबंदियों में खाता-खेसरा शून्य अंकित है और जमीन अब भी पिता-दादा के नाम दर्ज है। ऐसे में किसान रजिस्ट्री में नामांकन कराना व्यवहारिक नहीं रह गया है। उन्होंने मांग की कि राजस्व महाभियान के तहत लिए गए आवेदनों का शीघ्र निष्पादन हो, ऑनलाइन सुधार किया जाए और पोर्टल पर एक से अधिक जमाबंदी दर्ज कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही किसान रजिस्ट्री में वंशावली, एलपीसी जैसे दस्तावेजों को शामिल करने की मांग भी उठाई।
बटाईदार किसानों की अनदेखी पर आपत्ति
बैठक में बतौर अतिथि भाकपा (माले) प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि किसान रजिस्ट्री में बटाईदार किसानों के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जबकि बटाईदारी खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने इस योजना को कृषि-हितैषी योजनाओं से किसानों को बाहर रखने की साज़िश करार देते हुए आंदोलन तेज करने का आह्वान किया।
आंदोलन का एलान
बैठक में संगठनात्मक और आंदोलनात्मक फैसले लेते हुए 9 फरवरी को प्रखंड मुख्यालय के घेराव और 23 फरवरी को विधानसभा घेराव का निर्णय लिया गया। साथ ही सदस्यता अभियान में गति लाने, पंचायत व प्रखंड सम्मेलन आयोजित करने का भी संकल्प लिया गया।
किसान महासभा ने स्पष्ट किया कि जब तक किसान रजिस्ट्री की खामियां दूर नहीं होतीं और वास्तविक किसानों को योजनाओं का लाभ सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।