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पेंशन–वेतन विवाद के बाद कार्रवाई, तीन जनप्रतिनिधियों ने लौटाई अतिरिक्त राशि

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पटना | 21 जनवरी 2026
बिहार में वर्ष 2025 के दौरान सामने आए पेंशन और वेतन एक साथ लेने के विवाद के बाद अब मामला ठोस कार्रवाई तक पहुँचता दिख रहा है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत हुए खुलासों के दबाव में तीन वर्तमान एवं पूर्व जनप्रतिनिधियों ने पेंशन के रूप में ली गई अतिरिक्त राशि सरकारी खजाने में वापस जमा करा दी है। इस पूरे मामले में सबसे अधिक राशि लौटाने वालों में उपेंद्र कुशवाहा का नाम सामने आया है। उन्होंने पेंशन के रूप में प्राप्त 3 लाख 36 हजार 135 रुपये की रकम 11 दिसंबर 2025 को चालान के माध्यम से सरकारी कोष में जमा कराई। आरटीआई कार्यकर्ता शिवप्रकाश राय को सचिवालय कोषागार से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उपेंद्र कुशवाहा के अलावा जदयू विधायक रामसेवक सिंह और राजद विधायक राहुल कुमार ने भी अतिरिक्त पेंशन राशि लौटाई है। रामसेवक सिंह ने 53,867 रुपये 10 दिसंबर 2025 को और राहुल कुमार ने 30,400 रुपये 15 दिसंबर 2025 को पटना कोषागार में जमा कराए। वर्ष 2025 में आरटीआई के जरिए यह तथ्य सामने आया था कि बिहार के आठ विधायक-विधान पार्षदों के नाम पर पेंशन भुगतान दर्ज है, जिससे यह विवाद खड़ा हुआ कि कहीं माननीय वेतन और पेंशन दोनों तो नहीं ले रहे हैं। मीडिया में खबर आने के बाद राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया, जिसके बाद कोषागार पदाधिकारी को स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। सचिवालय कोषागार के वरीय कोषागार पदाधिकारी ने बताया कि आठ में से केवल एक विधायक भोला यादव का पेंशन भुगतान जारी है, जबकि शेष सात की पेंशन पहले ही बंद कर दी गई है। भोला यादव को 65 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन मिल रही है, जिसकी शुरुआत 14 नवंबर 2020 से हुई और नवंबर 2025 तक दर्ज है। कोषागार रिकॉर्ड के अनुसार उपेंद्र कुशवाहा को मार्च 2005 से अक्टूबर 2021 तक पेंशन मिली थी। वहीं दिनेश चंद्र ठाकुर को 86 हजार रुपये प्रतिमाह, ललन कुमार सर्राफ को 50 हजार रुपये प्रतिमाह, संजय सिंह को 68 हजार रुपये प्रतिमाह, सतीश चंद्र दुबे को 59 हजार रुपये प्रतिमाह, नीतीश मिश्रा को केवल दो महीने 43 हजार रुपये प्रतिमाह और विजेंद्र प्रसाद यादव को 10 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन निर्धारित अवधि में दी गई थी। आरटीआई एक्टिविस्ट शिवप्रकाश राय का कहना है कि विधायक-सांसदों को पहले से वेतन व अन्य सुविधाओं के रूप में लाखों रुपये मिलते हैं, इसके बावजूद पेंशन के नाम पर गलत भुगतान होना प्रशासनिक लापरवाही है। उनके अनुसार, लगातार प्रयास के बाद अब तक तीन जनप्रतिनिधियों से अतिरिक्त पेंशन की राशि वापस कराई जा सकी है।

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