नई दिल्ली।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संसद में केंद्रीय बजट 2026–27 प्रस्तुत करेंगी। यह उनका लगातार नौवां बजट होगा। ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक दबावों से गुजर रही है, भारत के लिए यह बजट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाला रोडमैप माना जा रहा है।
सरकार के ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार करने में इस बजट की भूमिका अहम होगी। यही कारण है कि उद्योग, एमएसएमई, किसान, स्टार्टअप, सेवा क्षेत्र और खास तौर पर मध्यम वर्ग को इस बजट से बड़ी राहत की उम्मीद है।
मध्यम वर्ग की सबसे बड़ी अपेक्षा: टैक्स में राहत
लगातार बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत के बीच मध्यम वर्ग को आयकर स्लैब में बदलाव, स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने और होम लोन पर अतिरिक्त टैक्स छूट की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार टैक्स बोझ कम करती है तो घरेलू खपत को सीधा बल मिलेगा।
एमएसएमई और स्टार्टअप: विकास की रीढ़
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) क्षेत्र सरकार से सस्ता कर्ज, सरल नियम और तकनीकी सहयोग की मांग कर रहा है। वहीं स्टार्टअप सेक्टर नवाचार, रिसर्च और फंडिंग को बढ़ावा देने के लिए टैक्स इंसेंटिव और नीति स्थिरता चाहता है।
किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नजर
ग्रामीण मांग को मजबूत करने के लिए कृषि, उर्वरक, सिंचाई और ग्रामीण रोजगार योजनाओं में बजट बढ़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों की आय बढ़ेगी, तो इसका सकारात्मक असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
हेल्थ, बीमा और शिक्षा सेक्टर की मांग
बढ़ती स्वास्थ्य लागत के बीच हेल्थ इंश्योरेंस को सस्ता और सुलभ बनाने की मांग तेज है। बीमा क्षेत्र टैक्स समानता और रिटायरमेंट सुरक्षा को मजबूत करने वाले कदमों की अपेक्षा कर रहा है। वहीं शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर अधिक निवेश को भविष्य के लिए जरूरी बताया जा रहा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट और होम लोन
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को गति देने के लिए सड़कों, रेलवे, स्मार्ट सिटी और आवास योजनाओं पर फोकस की उम्मीद है। रियल एस्टेट सेक्टर चाहता है कि होम लोन सस्ते हों और सीनियर सिटिजन लिविंग को औपचारिक मान्यता मिले।
डिजिटल, टेलीकॉम और ग्रीन एनर्जी
डिजिटल कनेक्टिविटी, ग्रामीण इंटरनेट, 5G विस्तार और साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश को समावेशी विकास की कुंजी माना जा रहा है। साथ ही बायोगैस, स्वच्छ ऊर्जा और कार्बन मार्केट से जुड़े क्षेत्रों को बजट में विशेष प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
उद्योग और निर्यात सेक्टर
मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात क्षेत्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा से निपटने के लिए लागत घटाने, नियम सरल करने और दीर्घकालिक नीति समर्थन की मांग कर रहा है।
कुल मिलाकर, बजट 2026 से यह उम्मीद की जा रही है कि सरकार विकास और राहत के बीच संतुलन बनाएगी। यदि मध्यम वर्ग की जेब में पैसा बचेगा, किसानों और उद्योगों को सहारा मिलेगा और इंफ्रास्ट्रक्चर को रफ्तार मिलेगी, तो भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिल सकती है।