पटना। बिहार की राजनीति में ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर जेडीयू विधायक अनंत सिंह को कानूनी मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। पटना स्थित विशेष MP-MLA कोर्ट ने 2014 में दर्ज रंगदारी मामले में उन्हें साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। यह मामला सालों से चर्चित रहा है, जिसमें आरोप था कि विधायक ने अपने सहयोगियों के माध्यम से 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी।
विशेष न्यायाधीश पंकज कुमार मालवीय ने सुनवाई के दौरान कहा कि अभियोजन पक्ष ने कोई ठोस सबूत या गवाह पेश नहीं किया, जिससे यह साबित हो सके कि आरोप सीधे तौर पर विधायक पर आधारित हैं। इसी आधार पर कोर्ट ने अनंत सिंह और उनके सहयोगी बंटू सिंह को आरोपों से मुक्त कर दिया। कोर्ट के फैसले के बाद समर्थकों में खुशी का माहौल है, और इसे राजनीति में सच की जीत के रूप में देखा जा रहा है।
मामला वर्ष 2014 का है, जब पटना के श्री कृष्णापुरी थाना क्षेत्र में राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, अनंत सिंह के करीबी बंटू सिंह सहित चार लोग उनके घर में घुसे और धमकी दी कि 'अनंत सिंह को 10 करोड़ रुपये पहुंचा दो'। इसके बाद पुलिस ने विधायक और उनके सहयोगियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, और यह मामला पिछले 11 वर्षों से न्यायालय में चल रहा था।
विशेष कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की दलीलें कमजोर साबित हुईं। वकील सुनील कुमार ने बताया कि मामले के अनुसंधानकर्ता (IO) के अलावा कोई भी गवाह अदालत में साक्ष्य देने नहीं आया। गवाहों की अनुपस्थिति और दस्तावेजों की कमी के कारण अदालत ने माना कि आरोप सीधे तौर पर सिद्ध नहीं होते। इसी आधार पर कोर्ट ने अनंत सिंह और बंटू सिंह को साक्ष्य के अभाव में रिहा करने का आदेश दिया।
फैसले के बाद कोर्ट परिसर के बाहर समर्थकों ने खुशी जाहिर की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 11 साल पुराने इस आपराधिक मामले से छुटकारा मिलने के बाद अनंत सिंह का राजनीतिक भविष्य और अधिक मजबूत हुआ है। लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे विधायक के लिए यह फैसला भारी राहत लेकर आया है, क्योंकि अब उनके ऊपर लगे गंभीर आपराधिक आरोपों का दाग मिट गया है।
विधायक के समर्थक इसे सच की जीत मान रहे हैं और उनका कहना है कि न्यायालय ने निष्पक्ष तरीके से निर्णय लिया है। इसके साथ ही, यह फैसला बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत भी देता है कि कानून के दायरे में सभी के लिए निष्पक्षता सुनिश्चित की जाती है।
विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि अनंत सिंह ने हमेशा अपने राजनीतिक करियर और जनसंपर्क में लोकतांत्रिक और कानूनी मार्ग को अपनाया। इस फैसले से उनके समर्थकों में उत्साह बढ़ा है और पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब विधायक राजनीतिक रूप से और अधिक सक्रिय होंगे।
इस बरी होने के फैसले ने न केवल अनंत सिंह को व्यक्तिगत रूप से राहत दी है, बल्कि बिहार की राजनीति में उनके प्रभाव और नेतृत्व को भी मजबूती प्रदान की है। पिछले 11 वर्षों से चल रहे इस मामले का समापन उनके राजनीतिक करियर और जनता के विश्वास को पुनः स्थिर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।