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छपरा में महिला सशक्तिकरण को नई उड़ान: जीविका दीदियों के ‘सिलाई घर’ का मुख्यमंत्री ने किया उद्घाटन

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समृद्धि यात्रा के दौरान खुला प्रशिक्षण-सह-उत्पादन केंद्र, सैकड़ों महिलाओं को मिलेगा रोजगार

छपरा (सारण)।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समृद्धि यात्रा के दौरान सारण जिले को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी सौगात दी है। 21 जनवरी को छपरा के बड़ा तेलपा स्थित राधे कृष्ण जीविका महिला संकुल संघ द्वारा संचालित ‘दीदी का सिलाई घर – प्रशिक्षण सह उत्पादन केंद्र’ का मुख्यमंत्री ने विधिवत उद्घाटन किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जीविका दीदियों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और उनके द्वारा तैयार किए गए परिधान, स्कूल ड्रेस एवं अन्य उत्पादों की गुणवत्ता की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह केंद्र ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक प्रभावशाली पहल है।

 100 से अधिक महिलाओं को

मिलेगा प्रत्यक्ष रोजगार
इस सिलाई एवं उत्पादन केंद्र में प्रारंभिक चरण में करीब 100 जीविका दीदियां कार्य करेंगी। यहां न केवल सिलाई कार्य होगा, बल्कि महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे भविष्य में स्वरोजगार से जुड़ सकें।
इस केंद्र के माध्यम से आंगनबाड़ी और स्कूली बच्चों के लिए ड्रेस तैयार की जाएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

 मुख्यमंत्री ने किया सीधा संवाद

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र में कार्यरत महिला उद्यमियों से बातचीत कर उनके अनुभवों को जाना। उन्होंने महिलाओं के आत्मविश्वास और कौशल की प्रशंसा करते हुए कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार योजनाएं चला रही है।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव, जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।

 10 हजार से उद्यम तक का सफर

छपरा सदर प्रखंड की जीविका दीदी पम्मी कुमारी ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्हें मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10,000 रुपये की प्राथमिक निवेश निधि मिली, जिससे उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी। आज वे नियमित रूप से अच्छी आय अर्जित कर रही हैं और अन्य महिलाओं को भी जीविका से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।


 सारण में लाखों महिलाएं बनी आत्मनिर्भर

सारण जिले में अब तक 4,79,782 महिलाओं को प्रति महिला 10,000 रुपये की सहायता राशि दी जा चुकी है। इस योजना के तहत कई महिलाएं आज चूड़ी निर्माण, कपड़ा सिलाई और अन्य लघु उद्योगों से जुड़कर न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं।

 मार्च 2026 तक 1.95 लाख बच्चों को मिलेगी ड्रेस

‘दीदी का सिलाई घर’ के माध्यम से सारण जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले 1 लाख 95 हजार बच्चों के लिए ड्रेस तैयार कर मार्च 2026 तक उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
इस कार्य में केंद्र की 120 जीविका दीदियों के साथ जिले के 20 प्रखंडों से प्रशिक्षण प्राप्त महिलाएं भी सामूहिक रूप से योगदान देंगी। इसके साथ ही स्कूलों के लिए भी ड्रेस तैयार कर आपूर्ति की जाएगी।

 आत्मनिर्भर बिहार की ओर मजबूत कदम

यह सिलाई सह उत्पादन केंद्र न केवल महिलाओं को रोजगार देने का माध्यम बनेगा, बल्कि स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर बिहार की परिकल्पना को साकार करने में भी अहम भूमिका निभाएगा। इस सौगात से जिले की जीविका दीदियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

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