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गांधी सेतु पर थम गई एक मासूम की छलांग, पुलिस की संवेदनशीलता ने बचाई जिंदगी

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वैशाली। कभी-कभी कुछ पल और सही फैसला किसी की पूरी जिंदगी बचा लेता है। वैशाली में ऐसा ही एक पल उस वक्त सामने आया, जब एक नाबालिग स्कूली छात्रा मानसिक तनाव में आकर गांधी सेतु पर अपनी जिंदगी खत्म करने पहुंच गई। लेकिन समय रहते पुलिस की समझदारी और मानवीय व्यवहार ने एक बड़ा हादसा होने से रोक दिया।
बीती रात स्कूल की ड्रेस में एक बच्ची गांधी सेतु के पाया संख्या 28 के पास रेलिंग के बाहर खड़ी नजर आई। राहगीरों को उसकी हालत असामान्य लगी। बच्ची डरी हुई थी, भावनाओं में डूबी और किसी से बात करने की स्थिति में नहीं दिख रही थी। आशंका को भांपते हुए लोगों ने तुरंत डायल 112 को सूचना दी।
सूचना मिलते ही महिला पुलिस अधिकारी के साथ टीम मौके पर पहुंची। हालात बेहद नाजुक थे। बच्ची रेलिंग के उस पार थी और किसी भी क्षण गंगा में कूद सकती थी। पुलिस ने न तो डराया और न ही जल्दबाजी दिखाई। टीम ने शांति से बच्ची से बात शुरू की, उसका भरोसा जीता और उसे यह एहसास दिलाया कि वह अकेली नहीं है।
काफी देर की बातचीत और समझाइश के बाद पुलिस ने बच्ची को सुरक्षित रेलिंग के इस पार लाया। इसके बाद उसे थाने ले जाकर आराम से बैठाया गया और काउंसलिंग कराई गई।
थाने में बच्ची ने जो वजह बताई, उसने सभी को भावुक कर दिया। बच्ची लालगंज थाना क्षेत्र की रहने वाली है। उसकी मां का पहले ही निधन हो चुका है। वह पटना के पुनाईचक इलाके में अपनी नानी के साथ रहती थी। मां की पुण्यतिथि पर वह मां की एक अच्छी तस्वीर बनवाना चाहती थी, लेकिन मन के मुताबिक तस्वीर न मिलने से वह टूट गई। इसी बीच पढ़ाई को लेकर मामा की डांट ने उसके दर्द को और बढ़ा दिया। भावनाओं में बहकर उसने यह खतरनाक फैसला कर लिया।
पुलिस ने तुरंत परिजनों को सूचना दी। परिजन थाने पहुंचे, जहां बच्ची को समझाया गया और सुरक्षित उनके हवाले कर दिया गया। साथ ही आगे ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए बच्ची की काउंसलिंग भी कराई गई।
मामले को लेकर एसडीपीओ सुबोध कुमार ने बताया कि समय पर सूचना और डायल 112 टीम की तत्परता से एक मासूम की जान बचाई जा सकी। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ संवाद और संवेदनशीलता बेहद जरूरी है, क्योंकि छोटी-सी बात भी उनके मन पर गहरा असर डाल सकती है।
यह घटना पुलिस की तत्परता के साथ-साथ समाज के लिए भी एक सीख है कि बच्चों के दर्द को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक हो सकता है। सही समय पर मिला सहारा एक जिंदगी को अंधेरे से बाहर ला सकता है।

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