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बिहार में रेलवे परियोजनाओं में घूसखोरी का बड़ा खुलासा, सीबीआई ने 45 लाख के साथ 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर 12 ठिकानों पर छापेमारी की
- Reporter 12
- 23 Jan, 2026
बिहार में रेलवे परियोजनाओं में भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है। पटना और आसपास के क्षेत्रों में गुरुवार को हुई इस कार्रवाई में केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक ही दिन में 12 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी कर घूसखोरी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया। जांच के दौरान करीब 45 लाख रुपये नकद बरामद किए गए और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में निजी निर्माण कंपनी एचजी इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अनूप सिंह, सहायक महाप्रबंधक गौरव कुशवाहा, अकाउंटेंट आकाश पात्रा और धीरज विरमानी शामिल हैं। वहीं, पूर्व मध्य रेलवे के निर्माण विभाग से जुड़े मुख्य अभियंता अनिल कुमार सहित 11 अन्य लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। सूत्रों के अनुसार, ये सभी रेलवे परियोजनाओं के बिलों के भुगतान और मंजूरी में अवैध लेन-देन और रिश्वतखोरी में शामिल थे। सीबीआई को लंबे समय से इस प्रकार की शिकायतें मिल रही थीं कि रेलवे परियोजनाओं में बिल पास कराने के बदले अधिकारियों को कथित रूप से लाखों रुपये की रिश्वत दी जा रही थी और निजी कंपनियों के अधिकारियों के साथ मिलकर यह काम किया जा रहा था। छापेमारी के दौरान पटना के महेंद्रूघाट स्थित पूर्व मध्य रेलवे के निर्माण कार्यालय, रोहतास जिले के डेहरी ऑन सोन समेत दर्जनों अन्य ठिकानों पर simultaneously दबिश दी गई। एजेंसी ने आरोपियों से पूछताछ के दौरान उनके नेटवर्क और अन्य अधिकारियों के नाम सामने लाने की कोशिश की। गिरफ्तार आरोपियों को देर शाम पटना स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां विशेष न्यायाधीश ने सभी को सात दिनों की रिमांड पर सीबीआई को सौंपा। रिमांड के दौरान सीबीआई इन आरोपियों से विस्तार से पूछताछ करेगी और यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि रेलवे निर्माण विभाग और निजी कंपनियों के बीच कितनी बड़ी साजिश चल रही थी। रिमांड के दौरान निजी कंपनी के अधिकारियों और रेलवे के वरिष्ठ अफसरों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने की संभावना जताई जा रही है ताकि नेटवर्क के अन्य जुड़े सदस्यों और वित्तीय लेन-देन का पूरा खुलासा हो सके। सीबीआई पटना की डीएसपी रूबी चौधरी इस मामले की जांच कर रही हैं और कहा जा रहा है कि इस कार्रवाई के बाद कई और नाम सामने आ सकते हैं, जिनमें रेलवे विभाग से जुड़े अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि रेलवे निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार और घूसखोरी की शिकायतें लंबे समय से एजेंसी तक पहुंच रही थीं और इसी वजह से सीबीआई ने इस बड़े स्तर की छापेमारी को अंजाम दिया। इस कार्रवाई से रेलवे परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को भी बल मिलेगा। फिलहाल सीबीआई इस मामले की जांच को और विस्तृत कर रही है, ताकि घूसखोरी के सभी तार जुड़ें और जिम्मेदार अधिकारियों और निजी कंपनी के अफसरों को कानून के सामने लाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि रिमांड अवधि के दौरान आरोपियों से कई अहम जानकारी हासिल की जाएगी, जिससे न सिर्फ रेलवे परियोजनाओं में भ्रष्टाचार का पैटर्न समझा जा सके, बल्कि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं की रोकथाम के लिए कदम उठाए जा सकें। इस पूरे मामले ने रेलवे निर्माण विभाग और निजी कंपनियों के बीच कथित अवैध लेन-देन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और आने वाले दिनों में इसकी जांच और विस्तार से होने की संभावना है। गिरफ्तारी और बरामदगी से यह संदेश भी गया है कि सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियां भ्रष्टाचार के खिलाफ गंभीर हैं और बड़े स्तर पर कार्रवाई करने में पीछे नहीं हट रही हैं।
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