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कर्तव्य पथ पर शक्ति, संस्कृति और संकल्प का प्रदर्शन, 77वें गणतंत्र दिवस पर परेड बनी भारत की विविधता की झलक

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नई दिल्ली।77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजधानी दिल्ली का कर्तव्य पथ भारत की सैन्य ताकत, सांस्कृतिक विरासत और आत्मनिर्भरता के संकल्प का जीवंत मंच बन गया। करीब डेढ़ घंटे तक चली भव्य परेड में जैसे ही मार्च-पास्ट की शुरुआत हुई, आधुनिक सैन्य उपकरणों और रंग-बिरंगी झांकियों ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
परेड के शुरुआती हिस्से में ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित झांकी, अपाचे और ध्रुव हेलीकॉप्टरों की गूंज और भीष्म व अर्जुन जैसे युद्धक टैंकों की मौजूदगी ने देश की रक्षा क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इन दृश्यों ने यह संदेश दिया कि भारत न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा में सक्षम है, बल्कि आधुनिक तकनीक के साथ आत्मनिर्भरता की राह पर भी मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
राज्यों की झांकियों में भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विविधता देखने को मिली। पश्चिम बंगाल की झांकी में बंकिम चंद्र चटर्जी और ‘वंदे मातरम’ को केंद्र में रखकर राष्ट्रीय गीत के 150 वर्षों की यात्रा को प्रस्तुत किया गया। मणिपुर की झांकी ने पारंपरिक कृषि से वैश्विक बाजार तक राज्य के बदलाव की कहानी दिखाई, जहां स्थानीय उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रहे हैं। गुजरात की झांकी ने राष्ट्रगान और स्वतंत्रता आंदोलन के बीच के ऐतिहासिक संबंध को रेखांकित किया, वहीं मध्य प्रदेश की झांकी में अहिल्याबाई होलकर की विरासत और महेश्वर घाट की स्थापत्य कला को श्रद्धांजलि दी गई।
सुरक्षा बलों की टुकड़ियों ने अनुशासन और समर्पण का प्रदर्शन किया। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस, दिल्ली पुलिस और सीमा सुरक्षा बल के ऊंट दस्ते की मार्च-पास्ट ने दर्शकों में जोश भर दिया। प्रत्येक टुकड़ी के नेतृत्व और तालमेल ने देश की आंतरिक सुरक्षा की मजबूती को दर्शाया।
परेड का एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य रहा तीनों सेनाओं के वेटरन्स की झांकी। ‘संग्राम से राष्ट्रनिर्माण तक’ थीम पर आधारित इस प्रस्तुति में युद्ध के मैदान से लेकर राष्ट्र के विकास में दिग्गजों की भूमिका को दिखाया गया। 3डी संरचना, युद्ध मशीनों के प्रतीक और अमर जवान ज्योति की झलक ने शहीदों को नमन करते हुए यह संदेश दिया कि सेवा की भावना सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी रहती है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोप से आए मुख्य अतिथि कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहे। कर्तव्य पथ पर सजी यह परेड न केवल एक उत्सव थी, बल्कि भारत की ताकत, परंपरा और भविष्य के संकल्प की सशक्त अभिव्यक्ति भी बनी।

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