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पटना हाईकोर्ट में नया अध्याय: जस्टिस अंशुल राज ने शपथ ग्रहण कर संभाला कार्यभार

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पटना: पटना हाईकोर्ट के शताब्दी भवन में आज, 27 जनवरी 2026 को न्यायपालिका में एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब नवनियुक्त जज अंशुल उर्फ़ अंशुल राज ने चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू के समक्ष शपथ ग्रहण की। यह समारोह सुबह संपन्न हुआ, जिसमें जजों, अधिवक्ताओं, सरकारी अधिकारियों और जस्टिस अंशुल राज के परिवार सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे।
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा नियुक्त अंशुल राज अब पटना हाईकोर्ट में जज के रूप में कार्यभार संभालेंगे। भारत सरकार के विधि और न्याय मंत्रालय की अधिसूचना 23 जनवरी 2026 को जारी की गई थी। उनकी नियुक्ति के बाद हाईकोर्ट में जजों की संख्या 38 हो जाएगी, जबकि स्वीकृत कुल पद 53 हैं। इसका मतलब यह है कि नियुक्ति के बाद भी 15 पद रिक्त रहेंगे।
नवनियुक्त जज अंशुल राज का जन्म 1971 में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पटना में पूरी की और सर गणेश दत्त पाटलिपुत्र हाई स्कूल से मैट्रिक पास की। इसके बाद उन्होंने पटना साइंस कॉलेज से आईएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की और स्नातक की पढ़ाई पटना यूनिवर्सिटी से पूरी की। एलएलबी की डिग्री उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से प्राप्त की।
वह 2003 में सुप्रीम कोर्ट में पंजीकरण कर प्रैक्टिस शुरू कर चुके थे। प्रारंभिक करियर में उन्हें पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त एक्टिंग चीफ जस्टिस नागेंद्र राय का मार्गदर्शन मिला। बाद में उन्होंने पटना हाईकोर्ट में प्रैक्टिस की, जहां उनके पिता वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा और सरकारी सलाहकार अरविंद उज्जवल के साथ कार्य किया। थोड़े समय के लिए अंशुल राज बिहार सरकार में विधि पदाधिकारी के रूप में भी रहे, जहां उन्होंने सरकार का पक्ष कोर्ट में रखा।
जस्टिस अंशुल राज के पिता योगेश चंद्र वर्मा प्रख्यात अधिवक्ता हैं और कई बार पटना हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं। वे बिहार राज्य बार काउंसिल के सदस्य भी हैं।
फरवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट कालेजियम ने अंशुल राज का नाम पटना हाईकोर्ट के जज के रूप में अनुशंसा की थी। दिसंबर 2024 में उन्हें वरीय अधिवक्ता का दर्जा भी मिला था।
पटना हाईकोर्ट में उनकी नियुक्ति को न्यायपालिका में युवा नेतृत्व और अनुभव का संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जस्टिस अंशुल राज के कार्यभार संभालने से कोर्ट की कार्यक्षमता और न्यायिक प्रक्रिया को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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