ताजपुर/समस्तीपुर, 29 जनवरी 2025:
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान विरोध प्रदर्शन और जुलूस निकालने से रोकने को लेकर समस्तीपुर जिले के ताजपुर में पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं। भाकपा (माले) नेता सुरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि जनता की आवाज उठाने और लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने से रोकने के लिए पुलिस ने उनके घर को घेर लिया और देर रात तक पूछताछ कर मानसिक दबाव बनाया।
माले नेता सुरेंद्र सिंह ने कहा कि वे संविधान प्रदत्त अधिकारों के तहत लंबे समय से जनता की समस्याओं, प्रशासनिक मनमानी और मानवाधिकार हनन के मामलों को उठाते रहे हैं। इसी कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि सवाल उठाने वाले जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को पुलिस के माध्यम से डराने-धमकाने की कोशिश हो रही है।
सुरेंद्र सिंह के अनुसार, बुधवार की रात करीब 1.30 बजे बड़ी संख्या में पुलिस बल उनके आवास पर पहुंचा और मुख्य द्वार के समीप काफी देर तक पूछताछ करता रहा। इस दौरान न तो कोई स्पष्ट कारण बताया गया और न ही कोई लिखित सूचना दी गई। देर रात हुई इस कार्रवाई से पूरे परिवार में भय का माहौल बन गया।
उन्होंने बताया कि पुलिस की इस घेराबंदी और पूछताछ के दौरान उनकी पत्नी एवं ऐपवा नेत्री बंदना सिंह, उनके बेटे-बेटी तथा आसपास के मुहल्लावासी भी बुरी तरह परेशान हुए। बच्चों और महिलाओं पर इसका गहरा मानसिक प्रभाव पड़ा। माले नेताओं का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे सामाजिक परिवेश को डराने की कोशिश है।
भाकपा (माले) ने इस घटना को लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला करार देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से जुलूस निकालना और सवाल उठाना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। उसे कुचलने के लिए पुलिस का इस्तेमाल निंदनीय है। पार्टी का आरोप है कि समृद्धि यात्रा जैसे सरकारी कार्यक्रमों के नाम पर असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
माले नेता सुरेंद्र सिंह ने समस्तीपुर के जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस मामले में न्याय नहीं दिया तो पार्टी जनआंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
इस घटना के बाद इलाके में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और विपक्षी दलों में पुलिस की भूमिका को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह इस मामले को कैसे देखता है और क्या दोषियों पर कोई कदम उठाया जाता है या नहीं