पटना।राजधानी पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब एक साथ दो स्तरों पर आगे बढ़ गया है। एक ओर बिहार सरकार ने इस संवेदनशील प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की सिफारिश कर दी है, वहीं दूसरी ओर यह मामला पटना हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका ने न सिर्फ जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि शहर के हॉस्टलों, खासकर महिला छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था को भी कठघरे में ला खड़ा किया है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा सीबीआई जांच की अनुशंसा के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य सरकार इस मामले को लेकर किसी भी तरह का संदेह नहीं छोड़ना चाहती। सरकार का कहना है कि केंद्रीय एजेंसी की जांच से सच्चाई सामने आएगी और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।
हाईकोर्ट में जनहित याचिका, कोर्ट निगरानी की मांग
नीट छात्रा की मौत को लेकर पटना हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका जहानाबाद निवासी सुषमा कुमारी की ओर से, हाईकोर्ट की अधिवक्ता अलका वर्मा द्वारा दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि यह मामला एक होनहार छात्रा की असामयिक और संदिग्ध मौत से जुड़ा है, जो अत्यंत गंभीर है। ऐसे में केवल पुलिस या प्रशासनिक जांच पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है और हाईकोर्ट को स्वयं इसकी निगरानी करनी चाहिए।
अधिवक्ता अलका वर्मा के अनुसार, याचिका में मांग की गई है कि जांच कोर्ट की निगरानी में कराई जाए, ताकि किसी भी तरह की लापरवाही या पक्षपात की गुंजाइश न रहे। इसके साथ ही, सभी हॉस्टलों—विशेषकर महिला छात्रावासों—में सीसीटीवी कैमरे लगाने, महिला वार्डन की अनिवार्य नियुक्ति और हॉस्टल रेगुलेटरी अथॉरिटी के गठन की भी मांग की गई है।
हॉस्टल प्रबंधन पर संदेह, व्यवस्था सुधारने की अपील
जनहित याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि घटना के बाद हॉस्टल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के बयान आपस में मेल नहीं खाते। विरोधाभासी बयानों के कारण अब तक जांच किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है। इसी आधार पर कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि न सिर्फ इस केस की निगरानी की जाए, बल्कि पटना शहर में संचालित हॉस्टलों की स्थिति सुधारने के लिए भी ठोस दिशा-निर्देश दिए जाएं।
घटना का क्रम: बेहोशी से मौत तक
मृत छात्रा जहानाबाद जिले की रहने वाली थी और पटना में रहकर नीट की तैयारी कर रही थी। 5 जनवरी 2026 को वह घर से लौटकर अपने हॉस्टल पहुंची थी। अगले ही दिन, 6 जनवरी की सुबह, वह अपने कमरे में बेहोशी की हालत में पाई गई। उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कई दिनों तक इलाज चला। अंततः 11 जनवरी 2026 को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
फॉरेंसिक रिपोर्ट ने बदली जांच की दिशा
शुरुआती जांच में पुलिस ने छात्रा की मौत का कारण नींद की गोलियों का ओवरडोज बताया था। हालांकि, बाद में जांच के दौरान सामने आई फॉरेंसिक रिपोर्ट ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। पुलिस के अनुसार, छात्रा के उन कपड़ों पर सीमेन के निशान पाए गए हैं, जो उसने अस्पताल ले जाते समय पहने थे। इसके बाद परिवार ने स्पष्ट रूप से यौन उत्पीड़न की आशंका जताई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई। इसी के मद्देनजर विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया।
परिवार का टूटता भरोसा
छात्रा के परिजन लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि उनकी बेटी के साथ कुछ गंभीर गलत हुआ है। शुक्रवार को परिवार पुलिस महानिदेशक से मिलने पहुंचा, जहां छात्रा की मां ने मीडिया के सामने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा कि अब उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद टूटती नजर आ रही है और पुलिस इस मामले को आत्महत्या की दिशा में मोड़ने की कोशिश कर रही है। परिवार का कहना है कि वे पूरी तरह से टूट चुके हैं, लेकिन फिर भी न्याय की आखिरी उम्मीद के साथ लड़ाई लड़ रहे हैं।
डीएनए जांच से खुलेगा राज?
इस बीच, पीटीआई से बातचीत में एक अधिकारी ने बताया कि फॉरेंसिक जांच में मिले सीमेन के नमूनों से डीएनए प्रोफाइल तैयार की जा रही है। इस प्रोफाइल का मिलान संदिग्धों और गिरफ्तार आरोपियों के डीएनए सैंपलों से किया जाएगा। इसी प्रक्रिया के तहत कई लोगों के डीएनए सैंपल लिए जा चुके हैं। अधिकारियों का दावा है कि वैज्ञानिक साक्ष्य इस मामले में निर्णायक साबित हो सकते हैं।
CBI और हाईकोर्ट की भूमिका पर टिकी निगाहें
अब जब एक तरफ सीबीआई जांच की सिफारिश हो चुकी है और दूसरी तरफ मामला हाईकोर्ट के समक्ष है, तो पूरे राज्य की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे जांच किस दिशा में जाती है। यह मामला सिर्फ एक छात्रा की मौत का नहीं, बल्कि छात्राओं की सुरक्षा, हॉस्टल व्यवस्था और जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता से भी जुड़ गया है। पीड़ित परिवार और समाज दोनों को उम्मीद है कि सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को कानून के कठघरे तक पहुंचाया जाएगा।