पटना।बिहार में अधिकारियों की पदस्थापना को लेकर जारी विवाद पर पटना हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने अपने पूर्व आदेश का अनुपालन नहीं होने पर नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि सरकार यह बताए कि आदेश का पालन अब तक क्यों नहीं किया गया और आगे इसे लागू करने की ठोस समय-सीमा क्या होगी।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति हरीश कुमार की एकलपीठ ने की। याचिकाकर्ता बिहार राजस्व सेवा संघ की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 19 जून 2025 को हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि डीसीएलआर (डिप्टी कलेक्टर लैंड रिफॉर्म्स) के पद पर केवल बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों को ही तैनात किया जाए। साथ ही, पहले से इन पदों पर कार्यरत बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को अन्य नवसृजित पदों पर समायोजित करने का निर्देश भी दिया गया था।
तीन महीने की समय-सीमा, फिर भी आदेश अधूरा
कोर्ट ने उस समय सरकार को तीन माह के भीतर पूरी प्रक्रिया संपन्न करने का आदेश दिया था। लेकिन निर्धारित अवधि से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि आदेश पारित होने के दो दिन बाद, यानी 21 जून 2025 को और उसके बाद भी बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को डीसीएलआर पद पर नियुक्त किया जाता रहा, जो अदालत के निर्देशों के विपरीत है।
सरकार की दलील, कोर्ट असंतुष्ट
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और विधानसभा चुनाव जैसे प्रशासनिक कार्यों में व्यस्तता के कारण अदालती आदेश का पालन समय पर नहीं हो सका। सरकार ने यह भी कहा कि वह आदेश के अनुपालन के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, कोर्ट इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखा और उसने इसे गंभीरता से लिया।
डीसीएलआर पद पर तकनीकी अधिकार किसका?
कोर्ट ने इस बात को रेखांकित किया कि डीसीएलआर का पद तकनीकी और सेवा संरचना के लिहाज से बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों के लिए निर्धारित है। ऐसे में इस पद पर अन्य सेवा के अधिकारियों की नियुक्ति न केवल नियमों के विपरीत है, बल्कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना भी मानी जाएगी।
तीन सप्ताह में हलफनामा अनिवार्य
अब हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विभाग को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। हलफनामे में सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि आदेश के पालन में अब तक देरी क्यों हुई, जिम्मेदारी किस स्तर पर है और आखिर कब तक डीसीएलआर पदों पर राजस्व सेवा अधिकारियों की पदस्थापना की जाएगी।
इस आदेश के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। अब सबकी निगाहें सरकार के हलफनामे पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि यह मामला केवल प्रशासनिक देरी का है या फिर अदालत के आदेशों की अनदेखी का गंभीर उदाहरण।