दरभंगा।उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा का दरभंगा दौरा केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने मिथिला की ऐतिहासिक विरासत और सामाजिक दायित्वों को विकास से जोड़ने का स्पष्ट संदेश दिया। शुक्रवार देर शाम दरभंगा पहुंचे उपमुख्यमंत्री ने सबसे पहले दिवंगत महारानी कामसुंदरी देवी के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित कर शोक संतप्त परिवार के साथ अपनी संवेदनाएं साझा कीं।
दरभंगा आगमन पर भाजपा जिलाध्यक्ष आदित्य नारायण चौधरी समेत पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यकर्ताओं से संक्षिप्त मुलाकात के बाद उपमुख्यमंत्री सीधे कुमार कपिलेश्वर सिंह के आवास पहुंचे, जहां उन्होंने महारानी कामसुंदरी देवी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया और इस दुख की घड़ी में साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि दरभंगा राज की भूमिका केवल मिथिला ही नहीं, बल्कि बिहार और देश के इतिहास में भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। यह विरासत आज भी समाज को दिशा देने का काम करती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की सांस्कृतिक धरोहर और विरासत को विकास से जोड़कर उसे नई पहचान देने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे आत्मगौरव के साथ प्रगति का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।
शनिवार को उपमुख्यमंत्री दरभंगा में आयोजित भूमि सुधार जन कल्याण संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम के माध्यम से वे आम लोगों की जमीन से जुड़ी समस्याओं को सीधे सुनेंगे और उनके समाधान की दिशा में आवश्यक कदम उठाएंगे। प्रशासनिक स्तर पर कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
कुमार कपिलेश्वर सिंह ने बताया कि उपमुख्यमंत्री द्वारा उनकी दादी महारानी कामसुंदरी देवी को श्रद्धांजलि दिया जाना पूरे परिवार के लिए भावुक क्षण रहा। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर दरभंगा के इतिहास और राजवंश की भूमिका पर आधारित एक पुस्तक भी उपमुख्यमंत्री को भेंट की गई, जिसे उन्होंने रुचि के साथ स्वीकार किया।
पत्रकारों से बातचीत में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि वे मिथिला की गौरवशाली परंपरा और विरासत को नमन करने आए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “विरासत ही विकास की नींव है। जिस दिन हम अपनी विरासत का सम्मान करना शुरू कर देंगे, उसी दिन विकास की रफ्तार अपने आप तेज हो जाएगी।” उन्होंने दोहराया कि दरभंगा महाराज की ऐतिहासिक भूमिका पर पूरा देश गर्व करता है और आने वाली पीढ़ियों को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।
उपमुख्यमंत्री का यह दौरा न सिर्फ शोक संवेदना और औपचारिकता का प्रतीक रहा, बल्कि मिथिला की पहचान, इतिहास और जनसमस्याओं को एक साथ केंद्र में लाने वाला संदेश भी देता नजर आया।