बिहार में नीट छात्रा के दुष्कर्म और हत्या के मामले को सीबीआई को सौंपे जाने के फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने इस निर्णय को लेकर नीतीश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे न्याय की दिशा में ठोस कदम मानने के बजाय “जिम्मेदारी से बचने” की कोशिश करार दिया है।
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अपराध के उद्भेदन और दोषियों को पकड़ने के बजाय सरकार ने मामले को सीबीआई को सौंपकर एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बिहार का प्रशासनिक ढांचा भ्रष्ट, अयोग्य और अनप्रोफेशनल हो चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य की पुलिस एक दुष्कर्म और हत्या जैसे गंभीर मामले को भी सुलझाने में नाकाम है, तो फिर कानून-व्यवस्था के दावों का क्या मतलब रह जाता है।
तेजस्वी यादव ने पूर्व के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि नवरुणा कांड जैसे कई मामलों में सीबीआई वर्षों तक आरोपियों तक नहीं पहुंच पाई और अंततः जांच बंद कर दी गई। उन्होंने आशंका जताई कि इस मामले में भी वही स्थिति दोहराई जा सकती है। तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा कि चुनावों के समय “जंगलराज” का शोर मचाने वाले लोग अब कहां हैं और बिहार की ध्वस्त कानून-व्यवस्था की जवाबदेही आखिर कौन लेगा। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या सरकार एक बार फिर हेडलाइन मैनेजमेंट के जरिए जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश करेगी।
इस मुद्दे पर आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बिहार की स्थिति चिंताजनक है और इस मामले में पीड़िता के चरित्र हनन तक की कोशिशें की गईं। मनोज झा के मुताबिक अब जब सरकार सीबीआई जांच की बात कर रही है, तो यह केवल “छलावरण” है और असली सवालों से बचने की कोशिश है।
वहीं, सरकार की ओर से उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि सरकार की नीयत साफ है और प्रारंभ से ही ईमानदारी से जांच कराने का प्रयास किया गया। उपमुख्यमंत्री के अनुसार, पीड़ित परिवार जांच से संतुष्ट नहीं था, इसलिए निष्पक्ष और पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए मामले को सीबीआई को सौंपने का फैसला लिया गया है।
इधर, सांसद पप्पू यादव ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भले ही कदम देर से उठाया गया हो, लेकिन यह जरूरी था। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में होनी चाहिए। पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि कई बड़े लोगों को बचाने के लिए मामले में घिनौने स्तर तक खेल खेला गया है और सभी चेहरों को बेनकाब करना जरूरी है। उन्होंने अपने पोस्ट में सीधे तौर पर पुलिस महकमे की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए।
नीट छात्रा के मामले में सीबीआई जांच के फैसले के बाद अब यह मुद्दा केवल न्याय तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार की कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक क्षमता और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर एक बड़े सियासी संघर्ष का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और उस पर सरकार व विपक्ष की भूमिका पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।