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बजट 2026-27: जलमार्ग से हाई-स्पीड रेल तक बदलेगा देश का ट्रांसपोर्ट मैप, पटना-वाराणसी को मिली रणनीतिक भूमिका

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नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट 2026-27 पेश करते हुए देश के परिवहन और बुनियादी ढांचे को नई दिशा देने वाले कई बड़े एलान किए। बजट भाषण में जल परिवहन, रेल नेटवर्क और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को मजबूती देने पर विशेष फोकस दिखा। इन घोषणाओं में बिहार और उत्तर प्रदेश को अहम केंद्र के रूप में उभरता हुआ देखा जा रहा है।
वित्त मंत्री ने बताया कि अगले पांच वर्षों में देशभर में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग शुरू किए जाएंगे। इसका उद्देश्य सड़क और रेल पर बढ़ते दबाव को कम करते हुए पर्यावरण के अनुकूल और किफायती परिवहन को बढ़ावा देना है। आंतरिक जल परिवहन को सशक्त बनाने के लिए वाराणसी और पटना में अत्याधुनिक जहाज मरम्मत सुविधा स्थापित की जाएगी। इससे गंगा नदी आधारित व्यापार, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
बजट में जल परिवहन से जुड़े मानव संसाधन विकास पर भी जोर दिया गया है। जलमार्गों के प्रभावी उपयोग के लिए प्रशिक्षण व्यवस्था विकसित की जाएगी ताकि स्थानीय युवाओं को तकनीकी दक्षता के साथ रोजगार मिल सके। इसके साथ ही समुद्री विमानों को प्रोत्साहन देने के लिए वीजीएफ यानी वायबिलिटी गैप फंडिंग योजना लागू करने की घोषणा की गई है, जिससे दुर्गम और जल आधारित क्षेत्रों में हवाई संपर्क आसान हो सकेगा।
रेल अवसंरचना के क्षेत्र में भी बजट 2026-27 को अहम माना जा रहा है। वित्त मंत्री ने देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार का रोडमैप पेश करते हुए बताया कि दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी जैसे प्रमुख कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। वाराणसी से सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का रूट बिहार से होकर गुजरने की संभावना है, जिससे राज्य को तेज रेल संपर्क का सीधा लाभ मिलेगा और पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
इसके अलावा दिल्ली–अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को राजस्थान से होकर ले जाने की घोषणा भी की गई है। बजट भाषण के दौरान कुल सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि देश में चरणबद्ध तरीके से छह प्रमुख हाई-स्पीड रेल लाइनों का निर्माण किया जाएगा। इनमें मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–चेन्नई, चेन्नई–बेंगलुरु, दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलमार्ग, वीजीएफ योजना और हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं का संयुक्त प्रभाव देश की लॉजिस्टिक्स लागत को कम करेगा, औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। खासकर पटना और वाराणसी जैसे शहर अब केवल धार्मिक या प्रशासनिक केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के रणनीतिक हब के रूप में उभरते नजर आ रहे हैं।
कुल मिलाकर बजट 2026-27 में किए गए ये एलान भारत के परिवहन ढांचे को आधुनिक, टिकाऊ और भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं। यदि योजनाएं समय पर जमीन पर उतरती हैं, तो आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक गति और क्षेत्रीय विकास को नई रफ्तार मिलना तय माना जा रहा है।

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