पटना: अब पुराने लैपटॉप, खराब एसी, बेकार मोबाइल या अनुपयोगी टीवी सिर्फ कबाड़ी के भरोसे नहीं रहेंगे। पटना नगर निगम ने इलेक्ट्रॉनिक कचरे के वैज्ञानिक और सुरक्षित निपटान के लिए ऐसा रेट चार्ट जारी किया है, जो आम लोगों को चौंका रहा है। कई इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर नगर निगम द्वारा तय की गई कीमतें बाजार में मिलने वाले कबाड़ी रेट से भी बेहतर बताई जा रही हैं।नगर निगम ने शहर में तेजी से बढ़ रहे ई-वेस्ट को देखते हुए नागरिकों, संस्थानों और कार्यालयों से इसे सीधे खरीदने का फैसला लिया है। निगम के अनुसार अब इलेक्ट्रॉनिक कचरे को घरेलू कूड़े में फेंकने के बजाय अधिकृत एजेंसी के माध्यम से संग्रहित कर री-साइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक ई-वेस्ट में सीसा, पारा और कैडमियम जैसे जहरीले तत्व मौजूद होते हैं। गलत तरीके से निस्तारण होने पर ये तत्व मिट्टी, पानी और हवा को प्रदूषित कर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इसी खतरे को देखते हुए निगम ने टेंडर प्रक्रिया के तहत एक एजेंसी को ई-वेस्ट के संग्रह और निपटान की जिम्मेदारी सौंपी है।
जारी रेट चार्ट के अनुसार कंप्यूटर और आईटी डिवाइस श्रेणी में कंप्लीट सीपीयू सेट के लिए 140 रुपये प्रति किलोग्राम, सीपीयू बॉक्स के लिए 85 रुपये, कीबोर्ड के लिए 20 रुपये, एलईडी मॉनिटर के लिए 35 रुपये और सीआरटी मॉनिटर के लिए 1 रुपये प्रति किलोग्राम का दाम तय किया गया है। वहीं लैपटॉप, टैबलेट और नोटपैड जैसी डिवाइस पर सबसे अधिक 150 रुपये प्रति किलोग्राम का भुगतान किया जाएगा।
इस योजना के तहत बड़े घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी शामिल किया गया है। कॉपर वाले स्प्लिट एसी के लिए 100 रुपये और विंडो एसी के लिए 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर निर्धारित की गई है। एल्युमिनियम वाले स्प्लिट एसी पर 70 रुपये और विंडो एसी पर 60 रुपये प्रति किलोग्राम का भुगतान होगा। रेफ्रिजरेटर के लिए 20 रुपये प्रति किलोग्राम और एलईडी व एलसीडी टीवी के लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर तय की गई है।
ई-वेस्ट के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए नगर निगम फरवरी के पहले और दूसरे सप्ताह में विशेष अभियान चलाएगा। इस दौरान शहर में चार ऑनग्राउंड जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनकी अवधि करीब 45 मिनट होगी। इन सत्रों में नागरिकों को बताया जाएगा कि इलेक्ट्रॉनिक कचरे का सुरक्षित निस्तारण क्यों जरूरी है और यह पर्यावरण व स्वास्थ्य को कैसे सुरक्षित रखता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पटना नगर निगम की यह पहल न सिर्फ ई-वेस्ट प्रबंधन को व्यवस्थित करेगी, बल्कि लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित होगी।