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2 से 6 फरवरी तक मिशन मोड में बनेगी फार्मर आईडी, बिहार में प्रशासन पूरी तरह सक्रिय

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पटना: बिहार में किसानों को डिजिटल पहचान से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने मिशन मोड में बड़ा अभियान शुरू किया है। आज यानी 2 फरवरी से 6 फरवरी तक पूरे राज्य में फार्मर आईडी बनाने का विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसको लेकर सभी डीसीएलआर को पहले ही निर्देश जारी कर दिए गए हैं। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के आदेश पर कृषि विभाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को समन्वय के साथ कार्य करने को कहा गया है, ताकि अधिक से अधिक किसानों को फार्मर रजिस्ट्री से जोड़ा जा सके।पटना जिले में इस अभियान को व्यापक रूप से लागू किया गया है। जिले की सभी 322 पंचायतों में सोमवार से 6 फरवरी तक फार्मर रजिस्ट्री के लिए विशेष कैंप लगाए जाएंगे। जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को शिविरों का सफल आयोजन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। उन्होंने सभी डीसीएलआर को अपने-अपने क्षेत्रों के अंचलों में नियमित समीक्षा करने और कार्य की प्रगति पर लगातार नजर रखने का आदेश दिया है। वहीं एडिशनल कलेक्टर को प्रत्येक अंचल की उपलब्धि की समीक्षा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए विभागीय हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। कृषि विभाग के हेल्पलाइन नंबर 18001801551 और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के हेल्पलाइन नंबर 18003456215 पर किसान किसी भी तरह की समस्या के लिए संपर्क कर सकते हैं। प्रशासन ने बताया कि सीएससी और वसुधा केंद्रों पर भी फार्मर रजिस्ट्री की सुविधा उपलब्ध है। सभी सीएससी में किसान जाकर अपना फार्मर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इसके अलावा किसान स्वयं भी ऑनलाइन पोर्टल bhfr.agristack.gov.in/farmer-registry-bh#/ के माध्यम से घर बैठे फार्मर आईडी बनवा सकते हैं।इस अभियान को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार ने प्रोत्साहन योजना भी लागू की है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के अनुसार जो जिले पीएम किसान योजना से लाभ लेने वाले किसानों का 50 प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्रेशन लक्ष्य पूरा करेंगे, उन्हें 15 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी। वहीं 35 प्रतिशत रजिस्ट्रेशन लक्ष्य हासिल करने वाले जिलों को 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि फार्मर आईडी बनने से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सकेगा और भविष्य में कृषि से जुड़ी सभी योजनाएं इसी डिजिटल पहचान से जोड़ी जाएंगी।

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