पटना: बिहार की राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए आज का दिन अहम रहा, जब विधानसभा में वित्त मंत्री विजेंद्र यादव ने वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। 3.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक के इस बजट को सरकार ने सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि “जीवन को आसान बनाने” की सोच के रूप में पेश किया है। बजट का संदेश साफ है—सम्मान के साथ विकास, अवसरों के साथ समृद्धि और बुनियादी ढांचे के साथ सामाजिक सशक्तिकरण।
सरकार के अनुसार बिहार अब तेज़ी से आगे बढ़ते राज्यों की कतार में खड़ा है। अनुमानित 14.9 प्रतिशत की विकास दर इस बात का संकेत है कि राज्य की अर्थव्यवस्था नई गति पकड़ रही है। बजट भाषण में “सात निश्चय-3” को केंद्र में रखते हुए अगले पांच वर्षों के लिए विकास की स्पष्ट दिशा तय की गई है, जिसका लक्ष्य बिहार को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है।
इस बजट का आकार अपने आप में एक कहानी कहता है। 2004-05 में जहां राज्य का कुल बजट 23,885 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 3.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह वृद्धि सिर्फ खर्च बढ़ने का नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक क्षमता और योजनाओं के विस्तार का संकेत देती है। खास बात यह है कि कुल व्यय का बड़ा हिस्सा पूंजीगत मद में रखा गया है, जिससे साफ है कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और दीर्घकालिक विकास पर दांव लगा रही है।
महिलाओं और कमजोर वर्गों को बजट में खास प्राथमिकता दी गई है। राज्य में 1.56 करोड़ से अधिक महिलाओं से जुड़े स्व-सहायता समूहों को पहले ही शुरुआती सहायता दी जा चुकी है और अब उनके कारोबार को विस्तार देने के लिए 2 लाख रुपये तक की मदद का रास्ता खोला गया है। वहीं अनुसूचित जाति के करीब 94 लाख गरीब परिवारों को सूक्ष्म उद्यमी बनाने की योजना से रोजगार और आत्मनिर्भरता को नई दिशा देने की कोशिश की गई है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कृषि, डेयरी और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में बड़े निजी निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में पूंजी आने से गांवों में आय बढ़ेगी और पलायन पर भी असर पड़ेगा। इसके साथ ही हर प्रखंड में डिग्री और इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की योजना शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी बजट में महत्वाकांक्षी घोषणाएं की गई हैं। जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी स्तर तक विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को बड़े शहरों की ओर न जाना पड़े। बुजुर्गों के लिए घर पर स्वास्थ्य सेवाएं और जन्म-मृत्यु से जुड़े कार्यों को आसान बनाने की योजना सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में कदम मानी जा रही है।
इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर नए एक्सप्रेस-वे, बिजली ढांचे का विस्तार और शहरी गरीबों के लिए बहुमंजिला पक्के घरों का निर्माण राज्य के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की तस्वीर बदलने की कोशिश है। वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास को गति दी जाएगी। लगभग 2.99 प्रतिशत का राजकोषीय घाटा तय सीमा के भीतर रखा गया है, जबकि पुराने कर्ज चुकाने के लिए भी पर्याप्त प्रावधान किया गया है।
कुल मिलाकर बिहार का यह बजट बड़े सपनों और ठोस योजनाओं का मिश्रण है। सरकार इसे विकास का अगला अध्याय मान रही है, जहां “ईमान, ज्ञान, विज्ञान, अरमान और सम्मान” के साथ राज्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की कोशिश की जा रही है। अब नजर इस पर रहेगी कि ये घोषणाएं जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से उतरती हैं।