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पटना की वीआईपी सड़कें बनीं जानलेवा: अटल पथ, गंगा पथ और डबल डेकर पुल पर बढ़ते हादसों ने बढ़ाई चिंता

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पटना की जिन सड़कों को राजधानी की आधुनिक पहचान और ट्रैफिक राहत का प्रतीक माना गया था, वही अब जानलेवा साबित हो रही हैं। अटल पथ, जेपी गंगा पथ और अशोक राजपथ स्थित डबल डेकर पुल के कई हिस्से धीरे-धीरे “एक्सीडेंट जोन” में तब्दील हो चुके हैं। आंकड़े बताते हैं कि इन वीआईपी कॉरिडोर पर हर साल 25 से 30 सड़क हादसे हो रहे हैं, जिनमें औसतन 8 से 10 लोगों की जान चली जा रही है, जबकि 40 से 50 लोग घायल हो रहे हैं।
तेज रफ्तार बनी सबसे बड़ी दुश्मन
जेपी गंगा पथ और अटल पथ को फास्ट मूवमेंट के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन यही रफ्तार अब सबसे बड़ा खतरा बन गई है। लंबी और चौड़ी सड़कें वाहन चालकों को जरूरत से ज्यादा स्पीड के लिए उकसा रही हैं। अचानक ब्रेक, लेन बदलना और ओवरटेक की होड़ अक्सर बड़े हादसों में बदल रही है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अधिकांश मामलों में एक्सीडेंट की वजह ओवरस्पीडिंग और वाहन नियंत्रण खो देना है।
डबल डेकर पुल पर नियमों की अनदेखी
अशोक राजपथ का डबल डेकर पुल रफ्तार से ज्यादा ट्रैफिक अनुशासन की अनदेखी के कारण हादसों का केंद्र बन रहा है। गांधी मैदान से पटना यूनिवर्सिटी की ओर जाने के लिए ऊपर वाले पुल और वापसी में नीचे वाले पुल का प्रावधान है, लेकिन बीएन कॉलेज के पास ‘नो एंट्री’ के बावजूद वाहन चालक रॉन्ग साइड से पुल पर चढ़ रहे हैं। खासकर ई-रिक्शा और बाइक सवार नियमों को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे आम लोगों की जान खतरे में पड़ रही है।
हालिया घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
बीते कुछ महीनों में हुए हादसों ने स्थिति की गंभीरता को उजागर कर दिया है।
1 फरवरी को गंगा पथ के एलसीटी घाट के पास तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार परिवार को कुचल दिया, जिसमें सात साल की बच्ची की मौत हो गई।
4 जनवरी को अटल पथ पर कार और पिकअप की टक्कर में एक कारोबारी के बेटे की जान चली गई।
13 जनवरी को शिवपुरी के पास कार-ऑटो टक्कर के बाद कार पलट गई और दो लोग घायल हुए।
26 जनवरी को दीघा थाना क्षेत्र में तेज रफ्तार एंबुलेंस ने फुटपाथी दुकानदार को टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई।
31 दिसंबर को अटल पथ पर अचानक ब्रेक लगने से तीन कारें आपस में भिड़ गईं।
सवालों के घेरे में ट्रैफिक मैनेजमेंट
लगातार हो रहे हादसों ने ट्रैफिक प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि इन सड़कों पर स्पीड कंट्रोल, स्पष्ट साइनेज, रॉन्ग साइड ड्राइविंग पर सख्त कार्रवाई और सीसीटीवी निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो राजधानी की ये हाईटेक सड़कें विकास की जगह हादसों की पहचान बनती चली जाएंगी।

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