शेखपुरा जिले में देश के कई राज्यों में साइबर ठगी को अंजाम देने वाले एक बड़े और संगठित गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। पटना से आई विशेष कार्य बल (एसटीएफ) और आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने शेखपुरा साइबर थाना पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए बरबीघा अनुमंडल के छबीलाठिका गांव में छापेमारी कर गिरोह के किंगपिन समेत पांच साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह लंबे समय से फर्जी विज्ञापन और झूठे ऑफर के जरिए लोगों को ठग रहा था और इसकी जड़ें बिहार से निकलकर देश के कई राज्यों तक फैल चुकी थीं। पुलिस कार्रवाई के बाद जिले में साइबर अपराध को लेकर हड़कंप मच गया है। पुलिस के अनुसार छापेमारी के दौरान छह एंड्रॉयड मोबाइल फोन, ठगी से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का सरगना राजु कुमार, पुष्पक कुमार, राजीव कुमार, अवनीश कुमार और मोहित कुमार शामिल हैं। सभी आरोपियों से गहन पूछताछ के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
इस पूरे मामले की जानकारी साइबर थाना की डीएसपी ज्योति कुमारी ने प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि पटना से आई एसटीएफ और ईओयू की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि छबीलाठिका गांव में साइबर ठगी का एक सक्रिय नेटवर्क काम कर रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने इलाके की घेराबंदी की। इस दौरान एक मंदिर के पास संदिग्ध गतिविधि देखी गई। पुलिस को देखते ही वहां मौजूद लोग भागने लगे, जिसके बाद चारों ओर से घेराबंदी कर करीब एक दर्जन संदिग्धों को पकड़ा गया। पूछताछ और तकनीकी जांच के बाद पांच लोगों की भूमिका साइबर ठगी में स्पष्ट रूप से सामने आई। वहीं दो आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए, जिनकी पहचान गांव के ही सचिन कुमार और अभिषेक उर्फ चुन्नु के रूप में हुई है। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह का किंगपिन राजु कुमार पहले से ही कई राज्यों की पुलिस के रडार पर था। उसके खिलाफ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई राज्यों में साइबर ठगी के मामले दर्ज हैं। इतना ही नहीं, उसका मोबाइल नंबर राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर करीब एक दर्जन बार दर्ज किया जा चुका है। गिरोह का तरीका बेहद शातिर था। ये लोग सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फर्जी विज्ञापन डालकर लोगों को सस्ते लोन, कम कीमत पर सीमेंट डीलरशिप और अन्य आकर्षक योजनाओं का लालच देते थे। जैसे ही लोग संपर्क करते, उनसे प्रोसेसिंग फीस, रजिस्ट्रेशन चार्ज और अन्य बहानों से पैसे ऐंठ लिए जाते थे। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि ठगी के इस नेटवर्क से गिरोह के हर सदस्य को हर महीने 40 से 50 हजार रुपये तक की अवैध कमाई हो जाती थी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शेखपुरा जिले में साइबर ठगी का यह नेटवर्क कोई नया नहीं है। करीब एक दशक पहले शेखोपुरसराय थाना क्षेत्र के मोहब्बतपुर गांव से इसकी शुरुआत हुई थी। झारखंड के कुख्यात जामताड़ा मॉडल से प्रेरित होकर यह तरीका पहले नालंदा जिले के कतरीसराय और फिर शेखपुरा जिले में फैला। शुरुआती वर्षों में यह गतिविधि कुछ गांवों तक सीमित थी, लेकिन धीरे-धीरे बरबीघा और आसपास के इलाकों में फैलती चली गई। आज स्थिति यह है कि जिले के ग्रामीण ही नहीं, शहरी इलाके भी साइबर ठगों के नेटवर्क से प्रभावित हो चुके हैं।
हालांकि सरकार ने साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए अलग से साइबर थाना और विशेष इकाइयों का गठन किया है, लेकिन अपराधियों की तकनीकी समझ और नेटवर्क के विस्तार के कारण चुनौती लगातार बनी हुई है। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में जिले में सक्रिय अन्य साइबर ठगों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी ऑनलाइन ऑफर, सस्ते लोन या डीलरशिप के झांसे में न आएं, बिना सत्यापन के किसी को भी पैसे न भेजें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत साइबर थाना या साइबर हेल्पलाइन पर करें।