दिनदहाड़े प्रॉपर्टी डीलर की हत्या से समस्तीपुर दहला, एनएच-28 पर शव रखकर प्रदर्शन
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तीन बाइक पर आए हमलावरों ने बरसाईं गोलियां, घटनास्थल से एक दर्जन खोखे बरामद
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समस्तीपुर जिले में अपराधियों के हौसले एक बार फिर बेखौफ नजर आए, जब रविवार को दिनदहाड़े प्रॉपर्टी डीलर गणेश सहनी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल बन गया। संयोगवश जिस वक्त कलेक्ट्रेट सभागार में एसपी समेत तमाम पुलिस अधिकारी अपराध नियंत्रण को लेकर बैठक कर रहे थे, उसी दौरान बदमाशों ने सरेआम फायरिंग कर हत्या की वारदात को अंजाम दे दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तीन बाइक पर सवार करीब छह बदमाश मौके पर पहुंचे और ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर फरार हो गए। घटना के बाद पुलिस ने घटनास्थल से करीब एक दर्जन खोखे बरामद किए हैं, जिससे साफ है कि हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे।
पुराने विवाद की आंच में हत्या की आशंका
पुलिस जांच में सामने आया है कि मृतक गणेश सहनी का तीन–चार दिन पहले किसी व्यक्ति से गंभीर विवाद हुआ था, जिसे लेकर पंचायत भी बैठी थी। पुलिस इसी विवाद को हत्या के संभावित कारण के तौर पर देख रही है। जिस तरह से सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया गया, उससे बदले की नीयत से हत्या की आशंका और गहरी हो गई है।
एनएच-28 पर बवाल, घंटों जाम
हत्या की खबर फैलते ही परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने गणेश सहनी का शव एनएच-28 स्थित गांधी चौक पर रखकर सड़क जाम कर दिया। देखते ही देखते मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। प्रदर्शनकारी मृतक के परिवार को मुआवजा देने और हत्यारों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर लोगों को समझाने का प्रयास किया गया।
एफएसएल ने जुटाए वैज्ञानिक साक्ष्य
सूचना मिलते ही पुलिस की एफएसएल टीम घटनास्थल पर पहुंची और वैज्ञानिक तरीके से जांच शुरू की। टीम ने खोखों, खून के नमूनों और अन्य भौतिक साक्ष्यों को एकत्र किया। साथ ही ई-साक्ष्य भी संकलित किए गए, ताकि जांच को मजबूत किया जा सके।
एसपी का दावा—पहचान हो चुकी, जल्द खुलासा
एसपी अरविंद प्रताप सिंह ने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि अपराधियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। पुलिस पुराने विवाद समेत सभी बिंदुओं पर गहन जांच कर रही है।दिनदहाड़े हुई इस सनसनीखेज हत्या ने एक बार फिर जिले की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि पुलिस कितनी तेजी से इस हत्याकांड का पर्दाफाश कर अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचा पाती है।
बैठक में अपराध पर चर्चा, सड़क पर लाश,कानून-व्यवस्था पर सवाल
रविवार को समस्तीपुर में जो हुआ, वह सिर्फ एक हत्या नहीं थी, बल्कि पूरे सिस्टम पर एक करारा तमाचा था। एक ओर कलेक्ट्रेट सभागार में पुलिस अधिकारी अपराध नियंत्रण की समीक्षा कर रहे थे, तो दूसरी ओर शहर की सड़कों पर दिनदहाड़े गोलियां चल रही थीं और एक प्रॉपर्टी डीलर की हत्या कर दी गई। यह विरोधाभास अपने आप में बहुत कुछ कह देता है।
दिन के उजाले में, भीड़-भाड़ वाले इलाके में ताबड़तोड़ फायरिंग कर अपराधी फरार हो जाते हैं और पीछे छोड़ जाते हैं दहशत, आक्रोश और एक लाश। यह साफ संकेत है कि अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ कमजोर पड़ा है। सवाल यह नहीं कि घटना कैसे हुई, बल्कि यह है कि ऐसी वारदातें रोकने में व्यवस्था क्यों नाकाम साबित हो रही है।
पुराने विवाद की जानकारी, पंचायत की खबर और फिर सरेआम हत्या—यह सब बताता है कि तनाव पहले से मौजूद था। अगर समय रहते इस तरह के विवादों पर नजर रखी जाती और प्रभावी हस्तक्षेप होता, तो शायद हालात यहां तक न पहुंचते। पुलिसिंग का मतलब सिर्फ घटना के बाद जांच करना नहीं, बल्कि अपराध से पहले खतरे को भांपकर उसे रोकना भी है।
एनएच-28 पर शव रखकर किया गया प्रदर्शन आम लोगों के गुस्से और असहायता को दर्शाता है। जब न्याय की उम्मीद कमजोर पड़ती है, तब सड़कें ही अदालत बन जाती हैं। यह स्थिति किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं है।
अब पुलिस के सामने केवल हत्यारों की गिरफ्तारी ही चुनौती नहीं है, बल्कि जनता के टूटते भरोसे को फिर से कायम करना भी उतना ही जरूरी है। अगर यह मामला भी सिर्फ फाइलों और बयानों तक सिमट गया, तो अपराधियों के हौसले और बुलंद होंगे। जरूरत है त्वरित कार्रवाई, पारदर्शी जांच और सख्त सजा की—तभी संदेश जाएगा कि कानून अब भी जिंदा है।