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बिहार विधानसभा में महिला कबड्डी विश्व कप विवाद: मंत्री-सदन में मंत्री को घेरा, कैबिनेट और अधिकारियों पर सवाल

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पटना। मंगलवार (10 फरवरी) का दिन बिहार विधानसभा में बजट सत्र के दौरान काफी गर्मागर्म रहा। सवाल-जवाब के लिए निर्धारित प्रश्नकाल के दौरान भाजपा के बैकुंठपुर विधायक मिथिलेश तिवारी ने खेल मंत्री श्रेयसी सिंह से महिला कबड्डी विश्व कप को रद्द करने और उससे जुड़े समझौतों को लेकर तीखे सवाल उठाए।
विधायक ने अपने सवालों में स्पष्ट किया कि पटना में आयोजित होने वाला महिला कबड्डी विश्व कप क्यों रद्द किया गया और संबंधित कैबिनेट निर्णय में तकनीकी और प्रशासनिक त्रुटियां कहाँ हुई। मिथिलेश तिवारी ने कहा, “मंत्री जी, आपने ऑनलाइन जवाब में कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था। लेकिन सवाल यह है कि केस 21 जनवरी 2025 को दर्ज हुआ, 31 जनवरी को सुनवाई हुई और अगली सुनवाई 17 फरवरी 2026 को तय है। 4 फरवरी 2025 को कोर्ट ने इंटरपोल और सीबीआई को जांच के आदेश दिए थे। इसके बावजूद 4 फरवरी को कैबिनेट ने 8 करोड़ रुपये से ज्यादा के करार को पास क्यों किया?”
श्रेयसी सिंह ने शांत स्वर में जवाब दिया कि कबड्डी महासंघ पर गंभीर आरोप हैं और सुप्रीम कोर्ट ने स्टे ऑर्डर पास किया है। इस वजह से राज्य सरकार ने महिला विश्व कप को रद्द किया। मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य किसी ऐसे फेडरेशन से जुड़ना नहीं चाहता, जिस पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हों।
मिथिलेश तिवारी ने जवाब को अधूरा और घुमावदार करार देते हुए पूछा कि जब कैबिनेट और विभाग को सब जानकारी थी, तब एमओयू 4 फरवरी को कैसे पास हो गया और 12 अप्रैल को साइन कर लिया गया। उन्होंने अधिकारियों की कथित लापरवाही और विभागीय अनदेखी पर भी सवाल उठाए।
मंत्री श्रेयसी सिंह ने बताया कि 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट का स्टे ऑर्डर आया और तत्काल एमओयू को हटाना संभव नहीं था। मामला पहले से लंबित था और गंभीर था। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान किसी राज्य को ऐसे फेडरेशन के साथ नाम जोड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। एमओयू साइन होने के बाद निर्णय लिया गया कि इसे स्थगित किया जाए।”
सदन में लगातार बहस के दौरान मिथिलेश तिवारी ने कहा कि मंत्री जवाब घुमा रही हैं। उन्होंने दोबारा पूछा कि 31 जनवरी को केस दर्ज होने के बाद 4 फरवरी को आदेश आने और एमओयू पास होने के बीच कैबिनेट ने कैसे कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की लापरवाही और गुमराह करने वाले कदमों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्पीकर ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि मामले की जांच करवाई जाए। इसके बाद सदन में थोड़ी शांति बनी। श्रेयसी सिंह ने जांच का आश्वासन दिया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 17 फरवरी को होने वाली है। विधायक ने भी कहा कि वे इस मामले पर लगातार नजर रखेंगे।
जानकारों का मानना है कि यह बहस केवल खेल मंत्री और विधायक के बीच तकनीकी सवालों तक सीमित नहीं थी, बल्कि भाजपा के अंदरूनी राजनीतिक खींचतान और विभागीय पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करती है। महिला कबड्डी विश्व कप के रद्द होने के कारण खिलाड़ियों और स्थानीय खेल जगत में निराशा फैली थी। विधायक ने कहा कि राज्य सरकार को ऐसी खेल आयोजनों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।
श्रेयसी सिंह अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज हैं और दूसरी बार विधायक बनी हैं। उन्होंने सदन में स्पष्ट किया कि सभी निर्णय नियम और कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए गए, लेकिन भविष्य में विभागीय और कैबिनेट प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समयबद्ध निर्णय सुनिश्चित करना आवश्यक है।
इस बहस ने यह भी उजागर किया कि खेल आयोजनों में वित्तीय और कानूनी प्रक्रिया का पालन, कैबिनेट निर्णयों की निगरानी और अधिकारियों की जवाबदेही जनता और खिलाड़ियों के हित में कितनी जरूरी है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से ही इस विवाद के तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर स्पष्टता आएगी।

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