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तेज प्रताप पर चुप्पी, नीट छात्रा की मौत पर आक्रामक तेवर: तेजस्वी यादव का दो टूक संदेश

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पटना में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव उस वक्त चर्चा के केंद्र में आ गए, जब उनसे बड़े भाई तेज प्रताप यादव को लेकर सीधे सवाल किए गए। लेकिन इस मुद्दे पर तेजस्वी यादव ने साफ शब्दों में दूरी बना ली। उन्होंने पत्रकारों से कहा— “उनका बात हमसे मत पूछा कीजिए”— और यहीं पर उन्होंने तेज प्रताप से जुड़े हर सवाल पर विराम लगा दिया। यह चुप्पी अपने आप में कई सियासी संकेत छोड़ गई।
दरअसल, 8 फरवरी को तेज प्रताप यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी और परिवार के भीतर साजिश का आरोप लगाया था। उन्होंने पांच लोगों को “जयचंद” बताते हुए नाम सार्वजनिक किए थे और दावा किया था कि उन्हीं के कारण उन्हें घर से बाहर किया गया और उनकी छवि खराब करने की कोशिश हुई। आज जब उसी बयान को लेकर तेजस्वी यादव से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने किसी भी तरह की टिप्पणी से इनकार कर दिया। यह साफ हो गया कि परिवार और पार्टी के अंदरूनी विवाद पर वे सार्वजनिक मंच से बोलने के मूड में नहीं हैं।
हालांकि, जैसे ही बात पटना में नीट छात्रा की मौत पर आई, तेजस्वी यादव के तेवर पूरी तरह बदल गए। उन्होंने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बिहार में अपराध बेलगाम हो चुका है और सबसे ज्यादा शिकार छोटी बच्चियां और छात्राएं हो रही हैं। उनके मुताबिक, नीट छात्रा का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि दरभंगा से एक और घटना सामने आ गई। यह दर्शाता है कि राज्य के कई जिलों में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध एक खतरनाक सिलसिले में बदल चुका है।
सरकार पर लीपापोती का आरोप
तेजस्वी यादव ने सदन में नीट मामले को लेकर हुए हंगामे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चाहे जांच सीबीआई को सौंप दी जाए, न्याय मिलना मुश्किल है, क्योंकि सरकार की मंशा सच्चाई सामने लाने की नहीं, बल्कि पूरे मामले को दबाने की है। उन्होंने पुराने मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि बालिका कांड हो या सृजन घोटाला—हर बार दोषियों को बचाने की कोशिश की गई।
उनका आरोप था कि एनडीए सरकार के शासन में अपराधियों को संरक्षण मिलता है और आम लोगों को न्याय नहीं। तेजस्वी यादव ने यहां तक कहा कि बिहार में अब लोकतंत्र नहीं, बल्कि “डर का तंत्र” कायम हो गया है, जहां सवाल उठाने वालों को दबाया जाता है।
एक तरफ चुप्पी, दूसरी तरफ हमला
इस पूरे घटनाक्रम में तेजस्वी यादव की रणनीति साफ दिखी—परिवार और पार्टी के आंतरिक विवाद पर मौन, लेकिन कानून-व्यवस्था और नीट छात्रा की मौत जैसे मुद्दों पर सरकार के खिलाफ खुला और आक्रामक रुख। उनकी यह भूमिका विपक्ष की राजनीति को धार देने के साथ-साथ सरकार के लिए आने वाले दिनों में दबाव भी बढ़ाने वाली मानी जा रही है।

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