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राष्ट्रीय आम हड़ताल: श्रम-किसान-मजदूर संगठनों ने ताजपुर में निकाला विशाल जुलूस, जोरदार प्रदर्शन और सभा में उठाईं केंद्र एवं राज्य सरकार के खिलाफ आवाज़

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किसान और मजदूर संगठन: भारत-अमेरिका ट्रेड डील रद्द करें, जीरामजी को बहाल करें, मनरेगा पुनर्बहाल करें, चार श्रमकोड वापस लें, सभी फसलों पर एमएसपी लागू हो
ताजपुर/समस्तीपुर, 12 फरवरी 2026:
देशभर में आयोजित राष्ट्रीय आम हड़ताल के अवसर पर ताजपुर में संयुक्त श्रम-किसान-मजदूर संगठनों ने भव्य जुलूस निकालकर प्रखंड मुख्यालय चौक पर जोरदार प्रदर्शन और सभा का आयोजन किया। हड़ताल की मुख्य मांगों में भारत-अमेरिका ट्रेड डील रद्द करना, चार मजदूर विरोधी श्रमकोड वापस लेना, मनरेगा में बदलाव को रद्द करना, बिजली एवं बीज विधेयक 2025 वापस लेना, किसानों के सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और एफआर में वंशावली लागू करना शामिल था।
गुरुवार को भाकपा माले, भाकपा और एसयूसीआई से जुड़े कार्यकर्ताओं ने ताजपुर गांधी चौक से अपने-अपने झंडे, बैनर और मांगों से संबंधित तख्तियों के साथ विशाल जुलूस निकालकर बाजार क्षेत्र का भ्रमण किया। कार्यकर्ताओं ने जोर-जोर से नारे लगाते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार के किसान-मजदूर विरोधी रवैये के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया। जुलूस प्रखंड मुख्यालय के राजधानी चौक पर पहुंचकर धरना प्रदर्शन में बदल गया, जहां सड़क किनारे बैठकर कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों की गूंज सुनाई।
सभा की अध्यक्षता भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह, भाकपा अंचल सचिव रामप्रीत पासवान और एसयूसीआई के जिला संयोजक चंद्रशेखर राय ने संयुक्त रूप से की। सभा का संचालन भाकपा के रामबृक्ष राय, किसान महासभा के ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह और खेग्रामस के प्रभात रंजन गुप्ता ने किया।
सभा को संबोधित करते हुए माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि आम हड़ताल की मांगों में ओपीएस बहाली, निजीकरण पर रोक, श्रमिक योजनाओं में धांधली बंद करना, दैनिक मजदूरी 700 रुपए करना, तिरहुत नहर परियोजना में अधिग्रहित जमीन और मकानों का वर्तमान सर्किल रेट का चार गुणा मुआवजा, आशा-रसोईया, सेविका-सहायिका और आपदा मित्रों को राज्य कर्मचारी घोषित कर 21 हजार रुपए मानदेय देना शामिल है।
भाकपा के रामप्रीत पासवान ने कहा कि काम के 8 घंटे को बढ़ाकर 12 घंटे करने वाला और यूनियन बनाने का अधिकार खत्म करने वाला चार श्रमकोड मजदूर विरोधी हैं और इन्हें स्वीकार नहीं किया जाएगा।
एसयूसीआई के चंद्रशेखर राय ने हड़ताल और जुलूस में शामिल ताजपुर वासियों को धन्यवाद देते हुए इसे ऐतिहासिक सफलता बताया। उन्होंने कहा कि इस हड़ताल ने मजदूर-किसान एकता को मजबूती प्रदान की और सरकार के खिलाफ जनभावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया।
सभा में भाकपा, भाकपा माले, एसयूसीआई और अन्य किसान-मजदूर संगठनों के दर्जनों नेता और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। रामबृक्ष राय, मो. अलाउद्दीन, मनोज राय, राजेश कुमार, गीता देवी, नगीना राम, पलटन साह, लाल बाबू राय, उपेंद्र राय, फूलो राय सहित अन्य ने सभा को संबोधित करते हुए अपने-अपने क्षेत्र और वर्ग की मांगों पर जोर दिया। बिहार राज्य आशा संघ और राज्य विद्यालय रसोइया संघ की ओर से भी नेताओं ने समर्थन और हड़ताल की सफलता की पुष्टि की।
ताजपुर हड़ताल और प्रदर्शन ने स्थानीय जनता, किसानों और मजदूरों के बीच सरकार के नीति विरोधी कदमों के खिलाफ जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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