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मुजफ्फरपुर को मिलेगी नई उड़ान: 57 साल बाद पताही एयरपोर्ट पुनर्जीवन की दिशा में बड़ा कदम, रनवे निर्माण का टेंडर जारी

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उत्तर बिहार की हवाई तस्वीर बदलने की तैयारी अब जमीन पर उतरती दिख रही है। लंबे इंतजार के बाद मुजफ्फरपुर के पताही हवाई अड्डे को फिर से सक्रिय करने की दिशा में ठोस पहल शुरू हो गई है। करीब 57 वर्षों से निष्क्रिय पड़े इस एयरपोर्ट को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार ने रनवे निर्माण का टेंडर जारी कर दिया है, जिससे पूरे प्रोजेक्ट में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। यह पहल केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि उत्तर बिहार की अर्थव्यवस्था, व्यापार और कनेक्टिविटी के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है।राज्य सरकार के अनुसार रनवे निर्माण के लिए लगभग 43.13 करोड़ रुपये की निविदा प्रक्रिया शुरू की गई है। कुल मिलाकर एयरपोर्ट के कायाकल्प पर करीब 72 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर और आसपास के जिलों के लाखों लोगों को हवाई यात्रा के लिए पटना या दरभंगा पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। अभी तक इन जिलों के यात्रियों को फ्लाइट पकड़ने के लिए कई घंटे सड़क यात्रा करनी पड़ती है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं। एयरपोर्ट शुरू होने से यह स्थिति पूरी तरह बदलने की उम्मीद है।परियोजना के तहत एयरपोर्ट को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। रनवे के साथ टैक्सी-वे, एप्रन, पेरिमीटर रोड, सुरक्षा दीवार, इमरजेंसी एक्सेस रोड और वाहन लेन का निर्माण होगा। पहले चरण में टर्मिनल भवन, एटीसी टावर, फायर स्टेशन और अन्य आवश्यक संरचनाएं तैयार की जाएंगी, जिस पर लगभग 28.58 करोड़ रुपये खर्च होंगे। दूसरे चरण में रनवे विस्तार और विमानों की पार्किंग सुविधाओं के विकास पर 43 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लगाई जाएगी। प्रस्तावित रनवे की लंबाई लगभग 1300 मीटर होगी, जिससे छोटे और मध्यम आकार के विमानों का संचालन संभव हो सकेगा।इस एयरपोर्ट के चालू होने से सबसे बड़ा लाभ व्यापार और कृषि क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है। मुजफ्फरपुर देशभर में ‘लीची की राजधानी’ के रूप में प्रसिद्ध है। हवाई सेवा शुरू होने पर लीची सहित अन्य कृषि उत्पादों का तेज और सुरक्षित परिवहन संभव होगा, जिससे किसानों और व्यापारियों को नए बाजार मिलेंगे। इसके साथ ही क्षेत्र में पर्यटन, निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है।स्थानीय लोगों के बीच इस परियोजना को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। दशकों से उपेक्षित पड़े एयरपोर्ट के पुनर्जीवन को लोग क्षेत्र के विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम मान रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एयर कनेक्टिविटी बढ़ने से उत्तर बिहार का आर्थिक परिदृश्य तेजी से बदल सकता है और यह इलाका निवेश के नए केंद्र के रूप में उभर सकता है।

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