मोहम्मद आलम
समस्तीपुर लोकसभा की सांसद पर रोसड़ा वासियों समेत पूरे क्षेत्र की जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों का आरोप है कि सांसद को छपास की बीमारी लग चुकी है। अख़बारों में फोटो छपवाना, सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री और रेल मंत्री के साथ तस्वीरें साझा करना ही इनकी असली राजनीति बनकर रह गई है।
रोसड़ा: विकास का नाम तक नहीं।रोसड़ा में अब तक कोई ठोस विकास कार्य नजर नहीं आता।
न तो रुसेरा घाट स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित हुआ।
न ही क्षेत्र में रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी कोई ठोस योजना लागू हुई।जनता का कहना है कि सांसद सिर्फ़ भाषणों और वादों तक सीमित हैं। हर जगह आवाज़ उठ रही है:
“भाषण नहीं, काम चाहिए”
“फोटो नहीं, ठहराव चाहिए”
खगड़िया के सांसद बने मिसाल, हमारी सांसद बनी मज़ाक
जनता तंज कसते हुए कह रही है कि खगड़िया लोकसभा से चुने गए सांसद ने हसनपुर जैसे छोटे स्टेशन को जंक्शन जैसा माहौल बना दिया, जहां से आज ट्रेनें भी चल रही हैं। दूसरी तरफ, समस्तीपुर की सांसद ने अब तक सिर्फ़ तस्वीरें खिंचवाकर वाहवाही लूटने का काम किया है।
रुसेरा घाट स्टेशन पर ट्रेन ठहराव नहीं होने के कारण नता का आक्रोश
रुसेरा घाट स्टेशन से दर्जनों एक्सप्रेस ट्रेनें गुजरती हैं, मगर ठहराव न होने से लोग त्रस्त हैं। यही वजह है कि यह मुद्दा रोसड़ा की जनता के लिए चुनावी सवाल बन चुका है।
रेल मंत्री के साथ सांसद की तस्वीरें खूब खिंच रही हैं। रेल मंत्री के साथ रोसड़ा स्टेशन पर ट्रेन ठहराव की बात भी हुई है, लेकिन नतीजा अब तक शून्य है। जनता सवाल उठा रही है—
“फोटो खिंचवाने से क्या फायदा?”
“रोसड़ा में ट्रेन कब रुकेगी, इसका जवाब कौन देगा?”
कुशेश्वर में भी विरोध, मंत्री अशोक चौधरी और सांसद को घेरा
नाराज़गी सिर्फ़ रोसड़ा तक ही सीमित नहीं रही। हाल ही में कुशेश्वर विधानसभा में बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी और उनकी पुत्री, समस्तीपुर की सांसद संभवी चौधरी, एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। लेकिन वहां भी जनता का गुस्सा फूट पड़ा।लोगों ने टूटी-फूटी सड़कों और विकास कार्यों के अभाव को लेकर ज़बरदस्त विरोध किया। बताया जाता है कि मंत्री अशोक चौधरी भीड़ के गुस्से से इतने आक्रोशित हो गए कि उन्होंने नाराज़ होकर कह दिया“अगर इतना ही गुस्सा है तो हमें तुम्हारा वोट नहीं चाहिए।” इस बयान से जनता का आक्रोश और भड़क गया।
पूरे लोकसभा क्षेत्र में नाराज़गी
जनता का कहना है कि समस्तीपुर लोकसभा के किसी भी विधानसभा क्षेत्र में सांसद अब तक विकास कार्य करने में नाकाम रही हैं। चाहे रोसड़ा हो, कुशेश्वर हो या कोई और इलाका हर जगह लोगों की जुबान पर एक ही सवाल है:
“वादे नहीं, विकास चाहिए”
“जनता को नहीं, प्रचार को क्यों चुनती हैं सांसद?”
जनता का दो टूक सवाल
लोगों का कहना है कि सांसद को बस प्रचार की भूख है, जनता के दुख-दर्द से कोई लेना-देना नहीं।
वर्षों बीत गए, लेकिन रोसड़ा और पूरे समस्तीपुर क्षेत्र का हक अब तक सिर्फ़ वादों, भाषणों और तस्वीरों में कैद है।