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बिहार राज्यसभा चुनाव में AIMIM ने किया सख्त रुख, तेजस्वी से बिना बातचीत के समर्थन से किया इंकार

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बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर विपक्ष और AIMIM के बीच हाल ही में चर्चा तेज हो गई है। राज्यसभा की पांच सीटों के लिए 5 मार्च को नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। एनडीए की ओर से सभी पांच सीटों पर उम्मीदवार पर्चा दाखिल कर चुके हैं। वहीं विपक्ष की तरफ आरजेडी ने रामधारी सिंह को एक सीट पर उतारा है। हालांकि विपक्ष के पास संख्या बल कम है और इसलिए AIMIM का समर्थन इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
इस मामले में AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन ने साफ किया है कि बिना तेजस्वी यादव या आरजेडी नेतृत्व के बड़े नेता से बातचीत किए बिना AIMIM किसी भी सीट पर समर्थन नहीं देगा। आदिल हसन ने एक वीडियो संदेश में कहा कि बिहार में विपक्ष को जीतने के लिए AIMIM के विधायकों का समर्थन जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी किसी की मोहताज नहीं है और सम्मान के बिना कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
आदिल हसन ने यह उदाहरण भी दिया कि तेलंगाना में AIMIM ने केवल तब समर्थन दिया था जब राज्य के मुख्यमंत्री ने सीधे असदुद्दीन ओवैसी से बात की थी। बिहार में भी यही प्रक्रिया लागू होगी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि AIMIM के पास पांच विधायक हैं और इसके अलावा बसपा के एक विधायक से भी बातचीत किए बिना कोई समर्थन नहीं मिलेगा।
आदिल हसन ने कहा कि उनका स्टैंड स्पष्ट है: AIMIM हमेशा बीजेपी के खिलाफ रही है और बिहार में भी वही स्थिति जारी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को AIMIM के साथ संवाद करना होगा और बिना शर्त या बातचीत किए कोई समर्थन नहीं मिलने वाला है।
राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि AIMIM का यह रुख बिहार के राजनीतिक समीकरणों में अहम मोड़ ला सकता है। अगर आरजेडी AIMIM के नेताओं से समय पर संपर्क नहीं करती है तो विपक्ष की जीत मुश्किल हो सकती है। वहीं AIMIM का यह निर्णय विपक्ष की रणनीति और चुनावी गणित को पूरी तरह प्रभावित करेगा।
बिहार में यह पहली बार नहीं है जब AIMIM ने अपने विधायकों के समर्थन को बातचीत से जोड़ा हो। आदिल हसन ने बताया कि पार्टी हमेशा अपने विधायकों के निर्णय को सम्मान और बातचीत पर आधारित करती है। बिहार में विपक्ष को AIMIM के समर्थन के बिना मुकाबला करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर राज्यसभा की एक सीट पर जहां संख्या बल काफी कम है।
इसलिए अब सबकी नजरें तेजस्वी यादव और आरजेडी नेतृत्व पर लगी हैं कि वे AIMIM से संपर्क कर सीट के लिए समर्थन सुनिश्चित कर पाते हैं या नहीं। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि AIMIM का रुख अगले कुछ दिनों में राज्यसभा चुनाव की दिशा तय करेगा और विपक्ष के लिए रणनीतिक महत्व रखेगा।

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