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मधुबनी: न्याय की गुहार लगाने आई महिला पर अमानवीय अत्याचार, इलाज के दौरान मौत

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मधुबनी: बिहार के मधुबनी जिले में न्याय की गुहार लगाने आई 40 वर्षीय महिला रौशन खातून के साथ अमानवीय व्यवहार और बेरहमी की मारपीट का मामला सामने आया है। घटना घोघरडीहा थाना क्षेत्र के अमही गांव की है। पीड़िता अपनी फरियाद लेकर मुखिया कुमारी देवी के घर गई थी। जानकारी के अनुसार बातचीत के दौरान दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया, जिसके बाद मुखिया ने अपने परिजनों को बुलाया और रौशन खातून के साथ मारपीट शुरू कर दी।
घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह था कि महिला को खंभे से बांधकर पीटा गया। परिजनों और मुखिया के सहयोगियों ने दरवाजे के सामने ही उसे बेरहमी से मारा, जिससे महिला को गंभीर चोटें आईं। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और रौशन को थाने लाया गया। हालांकि, गंभीर स्थिति को देखते हुए अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुरुआती इलाज के बाद उसे पटना मेडिकल कॉलेज भेजा गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें स्पष्ट दिख रहा है कि मुखिया और उसके परिजन महिला के साथ मारपीट कर रहे हैं। वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद मामला और भी गंभीर रूप ले गया।
इस घटना पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुखिया कुमारी देवी के बेटे मगनू सिंह को हिरासत में लिया और उससे पूछताछ शुरू कर दी। घोघरडीहा थाना में 28 फरवरी को मुखिया समेत कुल 17 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। एसडीपीओ अमित कुमार ने बताया कि मुख्य आरोपी मगनू सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की आगे की जांच जारी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने महिला को घायल अवस्था में तुरंत अस्पताल भेजने के बजाय घंटों थाने में रखा, जिससे लापरवाही सामने आई। अब पीड़िता के परिवार और ग्रामीणों ने सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मामले की गंभीरता और वीडियो वायरल होने के कारण प्रशासन और पुलिस की सक्रियता बढ़ गई है। जांच में हॉस्पिटल स्टाफ, परिजन और घटनास्थल से जुड़े सभी पहलुओं का विस्तार से पता लगाया जा रहा है। सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए अब जिले में प्रशासन सतर्क है।
यह घटना न केवल मधुबनी के लिए बल्कि पूरे बिहार के ग्रामीण न्याय व्यवस्था और महिला सुरक्षा की चुनौती को उजागर करती है। न्यायपालिका और पुलिस की जिम्मेदारी बनती है कि पीड़िता के परिवार को उचित न्याय और दोषियों को कड़ी सजा मिले, ताकि ऐसे अमानवीय और संवेदनशील मामलों पर कड़ा संदेश जाए।

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