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युद्ध की आंच से रसोई तक संकट: दरभंगा में गैस सिलेंडर के लिए सुबह 4 बजे से लाइन, खाली हाथ लौट रहे लोग

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दरभंगा: खाड़ी क्षेत्र में ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध का असर अब भारत के आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है। अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण एलपीजी आपूर्ति की रफ्तार धीमी पड़ने लगी है और इसका सीधा असर बिहार के कई जिलों में दिखाई देने लगा है। दरभंगा जिले के बहेड़ी बाजार और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों रसोई गैस के लिए उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं। हालात ऐसे हैं कि लोग तड़के चार बजे से ही गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर सिलेंडर लेकर लाइन में खड़े हो जाते हैं, लेकिन कई बार पूरे दिन इंतजार करने के बाद भी खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है।
दरभंगा के उपभोक्ता मोहन पंडित बताते हैं कि पिछले दो दिनों से वह सुबह चार बजे ही गैस लेने के लिए एजेंसी पहुंच जाते हैं, लेकिन देर शाम तक इंतजार करने के बावजूद उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। तेज धूप में घंटों खड़े रहने के बाद भी जब गैस नहीं मिलती तो मजबूरन खाली सिलेंडर लेकर घर लौटना पड़ता है। उनका कहना है कि एजेंसी की ओर से बताया जा रहा है कि प्लांट से गैस की आपूर्ति ही नियमित नहीं हो रही है, जिसके कारण वितरण में परेशानी आ रही है।
यह स्थिति सिर्फ एक उपभोक्ता की नहीं बल्कि पूरे इलाके की बन गई है। बहेड़ी बाजार के गैस गोदामों के बाहर इन दिनों रोजाना बड़ी संख्या में लोग सिलेंडर लेकर पहुंच रहे हैं। सुबह से लेकर शाम तक लंबी कतारें लगी रहती हैं। कई लोग अपने खाली सिलेंडर के साथ घंटों इंतजार करते हैं, लेकिन जब तक उनकी बारी आती है तब तक गैस खत्म हो जाती है। इससे लोगों की चिंता और परेशानी दोनों बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध की स्थिति बनने से गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। उपभोक्ता मो. शाहिद का कहना है कि गैस की कीमत पहले ही बढ़ चुकी है और अगर आगे सप्लाई और कम हुई तो घरेलू रसोई पर बड़ा असर पड़ेगा। इसी डर से लोग समय से पहले ही सिलेंडर लेने के लिए पहुंच रहे हैं ताकि घर में गैस का स्टॉक बना रहे। हालांकि बढ़ती भीड़ के बीच कई बार लोगों को सिलेंडर नहीं मिल पाता।
गैस एजेंसी संचालकों का भी कहना है कि मांग के मुकाबले आपूर्ति कम हो गई है। बहेड़ी स्थित एचपी गैस एजेंसी के संचालक विजय राज के अनुसार गैस प्लांट से पर्याप्त मात्रा में सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है। उनका कहना है कि यह समस्या सिर्फ दरभंगा की नहीं बल्कि कई इलाकों में देखी जा रही है। एजेंसी की ओर से उपलब्ध स्टॉक के आधार पर ही वितरण किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ उपभोक्ता जरूरत से अधिक गैस जमा करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो रही है।
इस बीच होली की छुट्टियों का असर भी आपूर्ति पर पड़ा है। एजेंसी संचालकों का कहना है कि त्योहार के कारण कई दिनों तक एजेंसियां बंद रहीं और गैस ढोने वाले वाहनों के चालक भी छुट्टी पर थे। इससे सप्लाई चेन प्रभावित हुई और कई जगह गैस की कमी महसूस की जा रही है।
उधर केंद्र सरकार इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश की रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है ताकि घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतें पूरी की जा सकें। साथ ही गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए एलपीजी रीफिलिंग के नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद दूसरे सिलेंडर की बुकिंग 25 दिन के अंतराल के बाद ही की जा सकेगी, जबकि पहले यह अवधि 21 दिन थी।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक गैर-घरेलू क्षेत्रों को भी प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए एक विशेष समिति बनाई गई है जो गैस आपूर्ति से जुड़े मामलों की समीक्षा करेगी।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी हाल ही में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर उच्चस्तरीय बैठकें की हैं। उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर बन रही जियोपॉलिटिकल परिस्थितियों के बावजूद भारत में ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने के लिए सरकार हर संभव कदम उठा रही है और नागरिकों को आवश्यक ईंधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
दरअसल फरवरी के अंतिम सप्ताह से मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर अस्थिरता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका असर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
बिहार में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत पहले ही बढ़कर एक हजार रुपये से ऊपर पहुंच चुकी है। वर्तमान में 14.2 किलोग्राम का घरेलू सिलेंडर लगभग 1002 रुपये 50 पैसे में मिल रहा है, जबकि पिछले महीने इसकी कीमत करीब 942 रुपये 50 पैसे थी। पिछले एक साल में गैस की कीमतों में करीब 60 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। ऐसे में लोगों को आशंका है कि अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ने पर कीमतें और बढ़ सकती हैं, इसी वजह से कई उपभोक्ता समय से पहले गैस लेने की कोशिश कर रहे हैं।
दरभंगा समेत बिहार के कई इलाकों में बन रही यह स्थिति फिलहाल आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गई है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य होगी ताकि रसोई की चिंता से राहत मिल सके।

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