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अब बिना ड्राइवर दौड़ेगी ‘पॉड टैक्सी’: पटना में शुरू होगी अल्ट्रा पॉड्स सेवा, 7 सेकेंड में मिलेगी सवारी, ट्रैफिक से मिलेगी राहत

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पटना: बिहार की राजधानी पटना में जल्द ही परिवहन व्यवस्था का एक बिल्कुल नया और आधुनिक चेहरा देखने को मिल सकता है। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो आने वाले महीनों में शहर के प्रशासनिक इलाके में ड्राइवरलेस यानी बिना चालक के चलने वाली ‘अल्ट्रा पॉड्स टैक्सी’ सेवा शुरू हो जाएगी। यह पूरी तरह कंप्यूटर नियंत्रित, स्वचालित और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन प्रणाली होगी, जो यात्रियों को ट्रैफिक जाम और सड़क की भीड़भाड़ से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है।
राज्य सरकार पटना को आधुनिक और स्मार्ट परिवहन प्रणाली से लैस करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। इसी कड़ी में विश्वेश्वरैया भवन से लेकर विधानसभा और सचिवालय तक करीब पांच किलोमीटर के दायरे में अल्ट्रा पॉड्स सेवा शुरू करने की योजना पर काम तेज कर दिया गया है। यह परियोजना राजधानी के सबसे व्यस्त प्रशासनिक क्षेत्र को जोड़ने वाली एक अत्याधुनिक पर्सनल रैपिड ट्रांजिट प्रणाली के रूप में विकसित की जाएगी।
इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने निर्माण कंपनी लार्सन एंड टर्बो (एलएंडटी) की टीम के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में कंपनी की ओर से परियोजना की विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें तकनीकी व्यवस्था, रूट, लागत और संचालन की रूपरेखा पर चर्चा हुई। अधिकारियों के अनुसार प्रशासनिक मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा और करीब 15 महीनों के भीतर यह प्रोजेक्ट तैयार कर लिया जाएगा। इस पूरी योजना पर लगभग 296 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
योजना के तहत अल्ट्रा पॉड्स का ट्रैक लगभग पांच किलोमीटर लंबा होगा, जो विश्वेश्वरैया भवन से शुरू होकर विकास भवन, विधानसभा और पुराने सचिवालय तक जाएगा। इस मार्ग पर कुल नौ स्टेशन बनाए जाएंगे, जहां से यात्री पॉड टैक्सी का उपयोग कर सकेंगे। इनमें से दो स्टेशनों के पास पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा पूरे सिस्टम के संचालन के लिए एक अत्याधुनिक कंट्रोल रूम और पॉड्स के लिए अलग पार्किंग सुविधा भी विकसित की जाएगी।
इस ट्रैक पर कुल 59 पॉड्स संचालित होंगे और प्रत्येक पॉड में छह यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। यह पूरी तरह स्वचालित प्रणाली होगी, जिसमें किसी ड्राइवर की आवश्यकता नहीं होगी। यात्रियों को केवल स्टेशन पर पहुंचकर अपने गंतव्य का चयन करना होगा और पॉड सीधे उन्हें उसी स्थान तक पहुंचा देगा। इस दौरान रास्ते में किसी प्रकार का ट्रैफिक जाम या अनावश्यक रुकावट नहीं होगी, जिससे यात्रा बेहद तेज और सुगम हो जाएगी।
यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पॉड्स की उपलब्धता बेहद तेज रखी जाएगी। योजना के अनुसार हर सात सेकेंड के अंतराल पर नया पॉड उपलब्ध होगा, जिससे व्यस्त समय में भी लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यात्री टोकन या रिचार्जेबल कार्ड के माध्यम से इसका किराया भुगतान कर सकेंगे। किराया भी इतना कम रखा जाएगा कि यह सेवा सभी वर्गों के लोगों के लिए सुलभ हो सके।
यह आधुनिक प्रणाली खासतौर पर सचिवालय और आसपास के प्रशासनिक भवनों के बीच आने-जाने वाले सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए काफी उपयोगी मानी जा रही है। इससे कार्यालय समय के दौरान होने वाले ट्रैफिक जाम में कमी आएगी और लोगों का समय भी बचेगा। साथ ही सरकारी कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहनों की संख्या कम होने से पूरे इलाके की यातायात व्यवस्था भी बेहतर हो सकेगी।
परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसे पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल तरीके से विकसित किया जाएगा। ट्रैक निर्माण के दौरान किसी भी पेड़ को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा और चूंकि यह सिस्टम बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक पॉड्स पर आधारित होगा, इसलिए प्रदूषण में भी कमी आएगी। सड़क पर वाहनों की संख्या घटने से कार्बन उत्सर्जन कम होगा और शहर की हवा अपेक्षाकृत साफ हो सकेगी।
सुरक्षा के लिहाज से भी इस प्रणाली को अत्याधुनिक बनाया जा रहा है। प्रत्येक पॉड में कैमरे और निगरानी व्यवस्था होगी, जिससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। पूरा संचालन कंप्यूटर और सेंसर आधारित तकनीक से नियंत्रित होगा, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना भी लगभग समाप्त हो जाएगी।
पॉड टैक्सी दरअसल पर्सनल रैपिड ट्रांजिट यानी पीआरटी तकनीक पर आधारित परिवहन प्रणाली है, जिसमें छोटे-छोटे कैप्सूल जैसे वाहन विशेष ट्रैक पर चलते हैं। यात्री टचस्क्रीन के माध्यम से अपना गंतव्य चुनते हैं और पॉड सीधे उसी स्टेशन तक पहुंचाता है। इस दौरान बीच में कहीं रुकने या वाहन बदलने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे यात्रा का समय काफी कम हो जाता है।
अगर पटना में यह परियोजना सफल होती है तो भविष्य में शहर के अन्य हिस्सों में भी इस तरह की आधुनिक परिवहन व्यवस्था का विस्तार किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी बल्कि राजधानी को स्मार्ट और आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने में भी मदद मिलेगी। बिहार सरकार की यह पहल राज्य में आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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