हाजीपुर/समस्तीपुर: महात्मा गांधी सेतु के पास एक कार से बरामद युवक के शव के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि मृतक युवक खुद एक सुपारी किलर के तौर पर समस्तीपुर में लोजपा (रामविलास) के नेता और जमीन कारोबारी रोहित कुमार उर्फ अंटू की हत्या करने गया था। इस वारदात के लिए उसे और उसके साथियों को करीब 10 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी। घटना के दौरान हुई गोलीबारी में वह खुद गंभीर रूप से घायल हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई। इसके बाद उसके ही साथियों ने शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की और कार में छोड़कर फरार हो गए।
वैशाली जिले के गंगाब्रिज थाना क्षेत्र में महात्मा गांधी सेतु के पाया नंबर-1 के पास 19 फरवरी को एक संदिग्ध अल्टो कार खड़ी मिली थी। जब पुलिस ने जांच की तो कार के अंदर एक युवक का शव बरामद हुआ था। उस समय यह मामला रहस्यमय बन गया था क्योंकि शव की पहचान तत्काल नहीं हो सकी थी और न ही यह स्पष्ट था कि युवक की मौत कैसे हुई।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए वैशाली के पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष जांच टीम का गठन किया गया। सदर-1 एसडीपीओ सुबोध कुमार के नेतृत्व में गंगाब्रिज थाना पुलिस और जिला आसूचना इकाई की संयुक्त टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल कॉल डिटेल के आधार पर जांच शुरू की। जांच के दौरान कार से बरामद एक सिम कार्ड पुलिस के लिए अहम सुराग साबित हुआ। इसी सिम कार्ड के जरिए मृतक की पहचान जहानाबाद जिले के हुलासगंज थाना क्षेत्र के मुसहौली गांव निवासी मुरारी शर्मा के पुत्र भानु कुमार के रूप में हुई।
पहचान होने के बाद पुलिस ने मृतक के संपर्कों और मोबाइल लोकेशन का विश्लेषण किया। इससे पता चला कि भानु कुमार 16 फरवरी की शाम पटना से समस्तीपुर गया था। इसी आधार पर पुलिस ने उसके एक करीबी साथी अभिषेक कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान अभिषेक ने पूरे घटनाक्रम का खुलासा कर दिया।
पुलिस के अनुसार 16 फरवरी को भानु कुमार और अभिषेक कुमार समस्तीपुर पहुंचे थे, जहां उनके पांच अन्य साथी पहले से मौजूद थे। सभी को समस्तीपुर के नगर थाना क्षेत्र में रहने वाले लोजपा (रामविलास) नेता और जमीन कारोबारी रोहित कुमार उर्फ अंटू ईश्वर की हत्या करने के लिए 10 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी। योजना के तहत सभी बदमाश कार और बाइक से नगर थाना क्षेत्र के बहादुरपुर इलाके में पहुंचे और रोहित कुमार पर हमला करने की तैयारी की।
17 फरवरी को जब रोहित कुमार अपने इलाके में थे, उसी दौरान बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलीबारी शुरू कर दी। अचानक हुए हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। बताया जाता है कि इस दौरान दोनों तरफ से गोली चली। इस फायरिंग में रोहित कुमार तो बच गए लेकिन उनके एक साथी शुभम कुमार घायल हो गए। वहीं दूसरी तरफ हमलावरों में शामिल भानु कुमार और उसका एक अन्य साथी भी गोली लगने से गंभीर रूप से जख्मी हो गए।
गोलीबारी के बाद सभी बदमाश मौके से भाग निकले और घायल साथियों को लेकर महुआ होते हुए पटना की ओर निकल गए। पटना पहुंचकर उन्होंने एक निजी नर्सिंग होम में भानु कुमार का इलाज कराने की कोशिश की, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। साथी की मौत के बाद बदमाशों में घबराहट फैल गई और उन्होंने शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई।
इसके बाद सभी आरोपी भानु के शव को कार में रखकर दियारा इलाके की ओर ले जाने लगे ताकि शव को कहीं फेंककर पहचान छिपाई जा सके। लेकिन रास्ते में गंगाब्रिज थाना क्षेत्र में पुलिस की गश्ती टीम को देखकर बदमाश घबरा गए। पकड़े जाने के डर से उन्होंने अल्टो कार को महात्मा गांधी सेतु के पिलर नंबर-1 के पास ही छोड़ दिया और मौके से फरार हो गए। जल्दबाजी में वे भानु का मोबाइल फोन अपने साथ ले गए, लेकिन उसका सिम कार्ड कार में ही गिर गया, जो बाद में पुलिस के हाथ लग गया।
यही सिम कार्ड पूरे मामले के खुलासे की सबसे बड़ी कड़ी बना। पुलिस ने इसके जरिए मृतक की पहचान की और उसके संपर्कों तक पहुंचकर पूरे हत्याकांड की परतें खोल दीं। पुलिस ने इस मामले में भानु के साथी अभिषेक कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। अभिषेक जहानाबाद जिले के हुलासगंज थाना क्षेत्र के मुसहौली गांव का रहने वाला है और राजकिशोर पासवान का पुत्र बताया गया है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि मृतक भानु कुमार का आपराधिक इतिहास रहा है। जहानाबाद थाना से मिली जानकारी के अनुसार उसके खिलाफ पहले से तीन आपराधिक मामले दर्ज थे। वहीं जिस अल्टो कार में उसका शव मिला था वह 18 फरवरी से ही गांधी सेतु के पास खड़ी थी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बदमाश घटना के बाद जल्दबाजी में कार छोड़कर भाग गए थे।
इधर जिस रोहित कुमार उर्फ अंटू को निशाना बनाया गया था, उनका भी आपराधिक और विवादों से जुड़ा इतिहास सामने आया है। बताया जाता है कि उनके खिलाफ पहले से करीब 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं। फिलहाल वह जमीन के कारोबार से जुड़े हुए हैं और लोजपा (रामविलास) के संसदीय बोर्ड में प्रदेश सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इस हमले के बाद रोहित कुमार ने समस्तीपुर नगर थाना में पांच नामजद और पांच से सात अज्ञात बदमाशों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
पुलिस का कहना है कि इस पूरे मामले में शामिल अन्य आरोपितों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। गिरफ्तार अभिषेक कुमार को न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही इस सुपारी किलिंग और फायरिंग कांड में शामिल सभी बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
यह मामला कई सवाल भी खड़े करता है कि आखिर समस्तीपुर में एक स्थानीय नेता की हत्या के लिए इतनी बड़ी सुपारी किसने दी और इसके पीछे किसका हाथ है। फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
संपादकीय: सुपारी की सियासत और बढ़ता अपराध—समस्तीपुर की घटना से मिलती चेतावनी
समस्तीपुर में लोजपा (रामविलास) के नेता और जमीन कारोबारी रोहित उर्फ अंटू ईश्वर पर हुए हमले की साजिश और उससे जुड़ी घटनाओं का पुलिस द्वारा किया गया खुलासा कई गंभीर सवाल खड़े करता है। दस लाख रुपये की सुपारी देकर हत्या की योजना बनाना और फिर उसी साजिश में शामिल शूटर का मारा जाना यह बताता है कि अपराध का जाल किस तरह संगठित और खतरनाक रूप ले चुका है।
यह मामला केवल एक व्यक्ति पर हमले या एक अपराधी की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस आपराधिक प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है जिसमें पैसे के दम पर किसी की भी जान लेने की साजिश रची जा सकती है। समस्तीपुर जैसे अपेक्षाकृत शांत माने जाने वाले जिले में इस तरह की सुपारी किलिंग की योजना बनना समाज और प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय है।
इस घटना का एक और पहलू यह भी है कि अपराधियों का नेटवर्क अब कई जिलों तक फैला हुआ दिखाई देता है। पटना से समस्तीपुर तक की गतिविधियां और फिर वैशाली के गांधी सेतु के पास कार में शव का मिलना यह दर्शाता है कि अपराधी अपने निशान मिटाने के लिए किस तरह कई जिलों की सीमाओं का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस के लिए तकनीकी जांच और समन्वय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
हालांकि इस मामले में पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर महत्वपूर्ण खुलासा किया है और एक आरोपी की गिरफ्तारी भी हुई है, जो सराहनीय कदम है। लेकिन इससे भी अधिक जरूरी है कि इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचा जाए और यह पता लगाया जाए कि आखिर इतनी बड़ी सुपारी देने वाला कौन था और इसके पीछे किसका स्वार्थ छिपा था। जब तक इस तरह की साजिशों के असली सूत्रधार सामने नहीं आते, तब तक अपराध की जड़ें कमजोर नहीं होंगी।
समाज के लिए भी यह घटना एक चेतावनी है। जमीन के कारोबार, राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और आपसी दुश्मनी के कारण अपराध का रास्ता अपनाना अंततः पूरे समाज को असुरक्षित बनाता है। यह जरूरी है कि कानून का भय कायम हो और यह संदेश स्पष्ट रूप से जाए कि अपराध का अंजाम अंततः विनाश ही होता है।
समस्तीपुर की यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि अपराध चाहे कितनी भी चालाकी से किया जाए, अंततः सच सामने आ ही जाता है। इसलिए प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे मामलों में सख्ती और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करे, ताकि समाज में कानून के प्रति विश्वास और अपराधियों के मन में भय दोनों कायम रह सके।