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विधायकों की अनुपस्थिति से महागठबंधन को नुकसान, एनडीए ने जीतीं पांचों सीटें

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पटना। बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने सभी सीटों पर जीत दर्ज कर ली है। चुनाव परिणाम आने के बाद सियासी गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच सत्ता पक्ष की जीत से ज्यादा महागठबंधन की हार की चर्चा हो रही है। खास बात यह है कि विपक्ष के पास समर्थन होने के बावजूद उसका उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर सका और उसे हार का सामना करना पड़ा।
महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने अमरेंद्र धारी सिंह को उम्मीदवार बनाया था। उन्हें एआईएमआईएम और बीएसपी का भी समर्थन मिला था, लेकिन इसके बावजूद वे जीत दर्ज नहीं कर सके। राज्यसभा चुनाव में उन्हें कुल 37 वोट ही मिल पाए। इनमें एआईएमआईएम के पांच और बीएसपी के एक विधायक का समर्थन शामिल है। यदि इन छह विधायकों का समर्थन भी नहीं मिलता तो महागठबंधन के उम्मीदवार के खाते में केवल 31 वोट ही आते।
इस चुनाव में महागठबंधन को बड़ा झटका उस समय लगा जब उसके चार विधायक मतदान के लिए ही नहीं पहुंचे। इनमें आरजेडी के विधायक फैसल रहमान और कांग्रेस के तीन विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा, मनोहर प्रसाद सिंह तथा मनोज विश्वास शामिल हैं। इन विधायकों की अनुपस्थिति का सीधा फायदा एनडीए उम्मीदवारों को मिला और गठबंधन ने पांचों सीटों पर जीत हासिल कर ली।
आरजेडी के विधायक फैसल रहमान का वोटिंग में शामिल नहीं होना राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्हें लालू परिवार का करीबी और तेजस्वी यादव का भरोसेमंद माना जाता है। पूर्वी चंपारण जिले की ढाका विधानसभा सीट से विधायक फैसल रहमान ने 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के पवन कुमार जायसवाल को महज 178 वोटों से हराया था। ऐसे में उनका मतदान में शामिल नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
इसी तरह कांग्रेस के फारबिसगंज विधायक मनोज विश्वास भी मतदान के लिए नहीं पहुंचे। उन्होंने 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के विद्या सागर केसरी को 221 वोटों से हराया था। कटिहार जिले की मनिहारी सीट से कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद सिंह ने भी मतदान नहीं किया। उन्होंने 2025 के विधानसभा चुनाव में जदयू के शंभू प्रसाद सुमन को 15168 मतों से हराया था। पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकिनगर से कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा भी वोटिंग में शामिल नहीं हुए। उन्होंने 2025 के विधानसभा चुनाव में जदयू के धीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह को 1675 वोटों से हराया था।
चुनाव परिणाम आने के बाद महागठबंधन के नेताओं ने एनडीए पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि इस चुनाव में सत्ता और धनबल का इस्तेमाल किया गया है। उनका कहना है कि बिहार ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी इस तरह की राजनीतिक घटनाएं देखने को मिल रही हैं।
वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार राम ने भी भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विपक्षी विधायकों को डराने-धमकाने और प्रलोभन देने की कोशिश की गई। उनके अनुसार कुछ विधायकों पर दबाव बनाया गया, जिसके कारण वे मतदान में शामिल नहीं हो सके।
राज्यसभा की पांच सीटों के लिए कुल छह उम्मीदवार मैदान में थे। एनडीए की ओर से भाजपा और जदयू के उम्मीदवारों के अलावा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी चुनाव मैदान में थे। वहीं महागठबंधन की ओर से आरजेडी ने अमरेंद्र धारी सिंह को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि अंतिम परिणाम में एनडीए ने सभी पांचों सीटों पर जीत हासिल कर ली, जबकि महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस नतीजे के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है और विपक्ष के भीतर भी एकजुटता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

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