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राज्यसभा पहुंचे नीतीश कुमार, चारों सदनों के सदस्य बनने की वर्षों पुरानी इच्छा हुई पूरी

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पटना। बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय और दो दशकों से अधिक समय तक राज्य की कमान संभाल रहे Nitish Kumar की एक पुरानी राजनीतिक इच्छा आखिरकार पूरी हो गई। सोमवार को वह राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो गए। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय संसदीय व्यवस्था के चारों प्रमुख सदनों—विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा—का सदस्य बनने का अनूठा मुकाम हासिल कर लिया है। बिहार की राजनीति में इसे एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक जीवन के शुरुआती दौर से ही Nitish Kumar की यह इच्छा रही थी कि वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के सभी प्रमुख सदनों में प्रतिनिधित्व करें। कई वर्ष पहले बिहार विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भी उन्होंने इस बात का जिक्र किया था कि वह लगभग सभी सदनों में काम कर चुके हैं और अब उनकी इच्छा राज्यसभा जाने की है। उस समय भी उनका यह बयान काफी चर्चा में रहा था।
हाल के राज्यसभा चुनाव में जब जनता दल (यूनाइटेड) ने उन्हें उम्मीदवार बनाया और उन्होंने नामांकन दाखिल किया, तब उन्होंने सार्वजनिक रूप से फिर यह बात कही कि संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनके मन में यह लक्ष्य रहा है कि वह बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों में भी काम करें। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने राज्यसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया।
राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद अब Nitish Kumar बिहार से इस सदन के सबसे वरिष्ठ नेताओं में गिने जाएंगे। लंबे प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव के कारण उनसे राज्यसभा में भी सक्रिय भूमिका निभाने की उम्मीद जताई जा रही है।
दरअसल, राष्ट्रीय राजनीति में भी उनका अनुभव काफी व्यापक रहा है। वह पहले भी केंद्र की राजनीति में सक्रिय रह चुके हैं और Atal Bihari Vajpayee के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। उस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं और योजनाओं पर काम किया था।
बिहार के विकास से जुड़े कई मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने में भी उनकी भूमिका चर्चा में रही है। पटना में आईआईटी और एनआईटी जैसी संस्थाओं को स्थापित कराने के प्रयासों का जिक्र वह अक्सर करते रहे हैं। इसके अलावा बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर भी उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन और रैलियों के माध्यम से आवाज उठाई थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा में उनकी मौजूदगी से राष्ट्रीय राजनीति में बिहार से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर मजबूती से उठाया जा सकता है। लंबे अनुभव और प्रशासनिक पृष्ठभूमि के कारण संसद के उच्च सदन में उनके विचार और हस्तक्षेप महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
इस घटनाक्रम का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि जनता दल (यूनाइटेड) के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े प्रमुख नेता अब एक साथ राज्यसभा में मौजूद रहेंगे। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि Nitish Kumar राज्यसभा में किस तरह की सक्रिय भूमिका निभाते हैं और राष्ट्रीय मुद्दों पर उनकी राजनीतिक रणनीति क्या रहती है।
बिहार की राजनीति में लंबे समय से प्रभावी भूमिका निभाने वाले नीतीश कुमार के लिए यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत राजनीतिक यात्रा का अहम पड़ाव है, बल्कि राज्य की राजनीति में भी एक नए अध्याय के रूप में देखी जा रही है।

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