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बेगूसराय: अस्पताल की लापरवाही ने मासूम की जान ले ली, स्ट्रेचर और एंबुलेंस की कमी ने किया बुरा हाल

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बिहार के बेगूसराय जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही ने एक छोटे मासूम की जान ले ली। नीमा चांदपुरा थाना क्षेत्र के कैथ गांव निवासी संतोष कुमार अपने बेटे लक्ष्य कुमार को इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर गए, लेकिन वहां न तो स्ट्रेचर उपलब्ध था, न ही सरकारी एंबुलेंस और न ही समय पर उचित इलाज। अस्पताल में घंटों भटकने के बाद, छोटे लक्ष्य की मौत हो गई, जिससे परिवार और ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया।
घटना का क्रम:
संतोष कुमार ने बताया कि उनके बेटे को अचानक उल्टियां शुरू हो गई थीं। पहले परिवार उसे निजी अस्पताल ले गया, जहां डॉक्टरों ने गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेगूसराय सदर अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल में पहुंचने पर हालात और बिगड़ गए। इमरजेंसी में स्ट्रेचर न मिलने के कारण संतोष को अपने बेटे को कंधे पर उठाकर विभिन्न विभागों में दौड़ लगानी पड़ी। अस्पताल के स्टाफ ने उन्हें बार-बार एक वार्ड से दूसरे वार्ड भेजा, लेकिन किसी डॉक्टर या नर्स ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
कुछ ही देर में इलाज न मिलने की वजह से लक्ष्य कुमार की मौत हो गई। संतोष ने बताया कि बेटे की मौत के बाद भी उनके लिए मुसीबतें खत्म नहीं हुईं। शव ले जाने के लिए सरकारी एंबुलेंस नहीं मिली, और उन्हें घंटों अपने मृत बेटे को गोद में लिए इंतजार करना पड़ा। एंबुलेंस चालक ने उन्हें फटकार लगाई और भगा दिया। मजबूर होकर परिवार ने 1100 रुपये में निजी एंबुलेंस बुक की, तभी शव को घर ले जाया जा सका।
परिवार और ग्रामीणों का आक्रोश:
संतोष कुमार और उनके परिजनों ने अस्पताल की लापरवाही और संसाधनों की कमी को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि अगर स्ट्रेचर, एंबुलेंस और समय पर इलाज उपलब्ध होता, तो शायद लक्ष्य की जान बच सकती थी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से तत्काल जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
स्थानीय लोग भी स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति को लेकर आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि बेगूसराय सदर अस्पताल में मरीजों को समय पर सुविधाएं न मिलने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। अस्पताल में आईसीयू और इमरजेंसी में संसाधनों की कमी ने एक मासूम की जिंदगी ले ली, और सरकारी एंबुलेंस की अनुपलब्धता ने परिवार की परेशानियों को और बढ़ा दिया।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल:
इस घटना ने बेगूसराय में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर चेतावनी दी है। स्ट्रेचर और एंबुलेंस की कमी केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता को दर्शाती है। यह सवाल उठता है कि कब तक मरीजों और उनके परिवारों को इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा, और कब स्वास्थ्य विभाग गंभीर रूप से इन मामलों को सुधारने की पहल करेगा।
आगे की कार्रवाई:
अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि परिवार और ग्रामीणों ने इसे गंभीर मामला बताते हुए तुरंत जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
यह हादसा बिहार में स्वास्थ्य सेवा की गंभीर कमी और संसाधनों की अनुपलब्धता को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अस्पताल और प्रशासन समय रहते उचित कदम उठाएं, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

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