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सारण में अवैध पोल्ट्री फार्म की दुर्गंध बनी जानलेवा, 30 दिन के नवजात की मौत से मचा हड़कंप

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अवैध रूप से संचालित पोल्ट्री फार्मों से निकल रही तीखी दुर्गंध एक मासूम की जान पर भारी पड़ गई। घटना के बाद इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है। लोगों ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और आगे की कार्रवाई जारी है।
बिहार के सारण जिले के नयागांव थाना क्षेत्र अंतर्गत राजापुर गांव में गुरुवार देर शाम एक 30 दिन के नवजात की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि घर के पास चल रहे अवैध पोल्ट्री फार्म से निकलने वाली तेज बदबू के कारण बच्चे की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे बचाया नहीं जा सका।
बताया जा रहा है कि नवजात अचानक असहज महसूस करने लगा। उसकी सांस लेने में दिक्कत बढ़ने लगी और शरीर में बेचैनी के लक्षण दिखाई देने लगे। परिवार के लोग घबराकर उसे तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक उसकी हालत काफी बिगड़ चुकी थी। डॉक्टरों ने काफी प्रयास किया, लेकिन अंततः बच्चे की जान नहीं बच सकी।
इस दर्दनाक घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। जिस घर में कुछ दिन पहले तक एक नवजात के जन्म की खुशियां थीं, वहां अब मातम का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे इस घटना के लिए सीधे तौर पर पोल्ट्री फार्म संचालकों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
मृतक के पिता राज कुमार राउत ने स्थानीय थाने में आवेदन देकर आरोप लगाया है कि उनके घर के पास स्थित मुर्गी और अंडा फार्म से लगातार तेज दुर्गंध निकलती रहती है। उनका कहना है कि इसी दुर्गंध के कारण उनके नवजात की तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई।
परिजनों के अनुसार, वे मूल रूप से अमनौर क्षेत्र के निवासी हैं और इन दिनों अपनी बहन के घर आए हुए थे। इसी दौरान यह घटना हुई। पिता ने भावुक होकर बताया कि उनके सामने उनका बच्चा तड़पता रहा, लेकिन वे उसे बचा नहीं सके।
स्थानीय ग्रामीणों का भी कहना है कि इलाके में कई पोल्ट्री फार्म बिना किसी निर्धारित मानकों के संचालित हो रहे हैं। इन फार्मों से निकलने वाली गंदगी और बदबू के कारण आसपास के लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। लोगों ने बताया कि इससे पहले भी कई बार प्रशासन को लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि पोल्ट्री फार्मों से निकलने वाला कचरा खुले में फेंका जाता है, जिससे वातावरण प्रदूषित होता है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए छपरा सदर अस्पताल भेज दिया गया। पुलिस ने परिजनों के आवेदन के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
थानाध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है।
प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि संबंधित विभागों को सूचना दी जा रही है, ताकि पोल्ट्री फार्मों की वैधता और उनके संचालन के मानकों की जांच की जा सके। यदि कोई फार्म अवैध पाया जाता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने पूरे इलाके में स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन अवैध फार्मों पर कार्रवाई की जाती, तो शायद यह घटना टल सकती थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि पोल्ट्री फार्मों के संचालन के लिए कुछ तय मानक होते हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है। यदि इन नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता है, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ता है।
इस घटना के बाद प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है कि वह ऐसे अवैध और मानकों के विरुद्ध चल रहे फार्मों के खिलाफ सख्त कदम उठाए। स्थानीय लोग चाहते हैं कि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और सभी की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि नवजात की मौत किन परिस्थितियों में हुई। लेकिन इस घटना ने यह जरूर दिखा दिया है कि लापरवाही और नियमों की अनदेखी किस तरह एक मासूम की जान ले सकती है।

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