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बिहार में भूमि सर्वेक्षण पर सख्ती, डिप्टी CM ने बनाई मॉनिटरिंग सेल, हर 15 दिन होगी समीक्षा

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पटना: बिहार में भूमि सर्वेक्षण कार्य को लेकर सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है। राज्य में चल रहे विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्यक्रम की गति तेज करने और इसकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के लिए उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Sinha ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। उन्होंने सर्वेक्षण कार्य की निगरानी के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग सेल के गठन का निर्देश दिया है, जो तय समय पर काम की समीक्षा करेगा और प्रगति पर लगातार नजर रखेगा।
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार यह मॉनिटरिंग सेल हर 15 दिनों पर सर्वेक्षण कार्य की समीक्षा करेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी जिलों में काम तय लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़े और कहीं भी ढिलाई न हो। उपमुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि भूमि सर्वेक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे उपमुख्यमंत्री ने इस अभियान को प्राथमिकता में रखते हुए स्पष्ट किया कि वे स्वयं भी हर 15 दिन में कार्य की समीक्षा करेंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे न केवल तय समयसीमा का पालन करें, बल्कि काम की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दें। उनका कहना है कि यह कार्यक्रम राज्य के भूमि प्रबंधन को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
उपमुख्यमंत्री ने सभी जिलों के बंदोबस्त पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे रोजाना के आधार पर काम की योजना बनाएं। प्रत्येक दिन का लक्ष्य तय किया जाए और उसी के अनुरूप कार्य किया जाए। दिनभर किए गए काम की समीक्षा शाम को की जाए और उसकी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाए। इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि हर स्तर पर जवाबदेही तय रहे और काम की गति बनी रहे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा कार्य में लापरवाही बरती जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार इस पूरे अभियान को बेहद गंभीरता से ले रही है और किसी भी तरह की अनियमितता को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे फील्ड स्तर पर मौजूद समस्याओं का तत्काल समाधान करें, ताकि सर्वेक्षण कार्य में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
जानकारी के मुताबिक, भूमि सर्वेक्षण कार्य को दो चरणों में पूरा किया जा रहा है। पहले चरण में राज्य के 20 जिलों के 89 अंचलों को शामिल किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि इन क्षेत्रों में सर्वेक्षण कार्य इस वर्ष के अंत तक हर हाल में पूरा कर लिया जाए। अभी तक इस चरण में काफी प्रगति दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 67 प्रतिशत से अधिक मौजों का ड्राफ्ट पब्लिकेशन पूरा हो चुका है, जबकि 33 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रों में फाइनल पब्लिकेशन भी किया जा चुका है।
दूसरे चरण में 36 जिलों के 445 अंचलों को शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में त्रिसीमाना निर्धारण, सीमा सत्यापन और किश्तवार जैसे कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। उपमुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन सभी प्रक्रियाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। इसके लिए अतिरिक्त संसाधन और आवश्यक सहयोग भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
सर्वेक्षण कार्य की बेहतर निगरानी के लिए भू अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय में भी एक विशेष टीम का गठन किया गया है। यह टीम पूरे राज्य में चल रहे कार्यों की प्रगति पर नजर रख रही है और समय-समय पर रिपोर्ट तैयार कर रही है। मॉनिटरिंग सेल और इस विशेष टीम के बीच समन्वय स्थापित कर काम को और प्रभावी बनाया जा रहा है।
उपमुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान यह भी बताया कि शेखपुरा जिला सर्वेक्षण कार्य में काफी आगे बढ़ चुका है और वहां काम अंतिम चरण में पहुंच गया है। उन्होंने इसे एक सकारात्मक उदाहरण बताते हुए अन्य जिलों के अधिकारियों से अपील की कि वे भी इसी तरह लक्ष्य तय कर काम में तेजी लाएं। उनका कहना है कि अगर सभी जिले इसी गति से काम करें, तो पूरे राज्य में सर्वेक्षण कार्य समय पर पूरा किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भूमि सर्वेक्षण और बंदोबस्त कार्यक्रम केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध आम लोगों की समस्याओं से जुड़ा हुआ है। राज्य में जमीन से जुड़े विवादों की संख्या काफी अधिक है, जिनका एक बड़ा कारण स्पष्ट अभिलेखों का अभाव है। इस अभियान के पूरा होने के बाद जमीन के रिकॉर्ड अपडेट और पारदर्शी हो जाएंगे, जिससे विवादों में कमी आएगी।
उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Sinha का मानना है कि इस कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन से न केवल प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि आम जनता को भी राहत मिलेगी। लोगों को जमीन से जुड़े मामलों में कम परेशानी का सामना करना पड़ेगा और राजस्व से संबंधित प्रक्रियाएं आसान होंगी।
सरकार इस दिशा में तकनीकी संसाधनों का भी उपयोग कर रही है, ताकि सर्वेक्षण कार्य को आधुनिक तरीके से और अधिक सटीक बनाया जा सके। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने और उन्हें ऑनलाइन उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को अपने जमीन से जुड़े दस्तावेज आसानी से मिल सकेंगे।
कुल मिलाकर बिहार में भूमि सर्वेक्षण कार्य को लेकर सरकार की सक्रियता अब और बढ़ गई है। मॉनिटरिंग सेल के गठन और नियमित समीक्षा की व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि सरकार इस अभियान को समय पर और प्रभावी तरीके से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं और काम में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।

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