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दानापुर में निर्माणाधीन पुल गिरा, मलबे में दबे मजदूर; घटिया निर्माण पर उठे गंभीर सवाल

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पटना। राजधानी के दानापुर अनुमंडल के ढिबरा इलाके में शनिवार को एक बड़ा हादसा हो गया, जब निर्माणाधीन पुल अचानक भरभराकर गिर पड़ा। इस घटना में काम कर रहे मजदूर मलबे में दब गए, जिनमें एक की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे ने न केवल निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी और ठेकेदार की कार्यशैली पर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, विजय सिंह पथ से ढिबरा को जोड़ने के लिए सड़क और पुल का निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान अचानक पुल का ढांचा ताश के पत्तों की तरह ढह गया। मौके पर मौजूद मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वे मलबे के नीचे दब गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और जेसीबी मशीन की मदद से मलबा हटाया गया।
काफी मशक्कत के बाद एक मजदूर को गंभीर हालत में बाहर निकाला गया, जिसे तुरंत अस्पताल भेजा गया। चिकित्सकों के अनुसार उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है और वह जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। वहीं, एक अन्य मजदूर ने सूझबूझ दिखाते हुए पुलिया के नीचे छिपकर अपनी जान बचा ली, जिससे वह इस हादसे में बाल-बाल बच गया।
इस घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करने लगे। ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण में शुरू से ही भारी लापरवाही बरती जा रही थी, जिसकी शिकायत भी कई बार की गई थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि पुल का निर्माण बिना मजबूत नींव और पिलर के सीधे मिट्टी पर किया जा रहा था, जो बेहद खतरनाक था। इतना ही नहीं, निर्माण कार्य में सरिया जैसी जरूरी सामग्री का भी उपयोग नहीं किया गया और निम्न गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था। लोगों का आरोप है कि इस तरह की अनदेखी और भ्रष्टाचार के कारण ही यह हादसा हुआ है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि इलाके में इसी तरह के दो पुलों का निर्माण किया जा रहा था। इनमें से एक पुल तो गिर चुका है, जबकि दूसरा पुल भी उसी तकनीक और सामग्री से बनाया जा रहा है। ऐसे में लोगों को डर है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई, तो दूसरा पुल भी कभी भी हादसे का कारण बन सकता है।
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों ने ठेकेदार और संबंधित विभाग के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि दूसरे निर्माणाधीन पुल की तुरंत तकनीकी जांच कराई जाए और जब तक उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित न हो, तब तक निर्माण कार्य पर रोक लगा दी जाए। लोगों का कहना है कि विकास कार्य जरूरी है, लेकिन लोगों की जान से खिलवाड़ कर किसी भी कीमत पर निर्माण नहीं किया जाना चाहिए।
इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं। अक्सर देखा जाता है कि ठेकेदार लागत बचाने के चक्कर में घटिया सामग्री का इस्तेमाल करते हैं, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है।
प्रशासन की ओर से फिलहाल मामले की जांच की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि घटना की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी की गई होती, तो इस हादसे को रोका जा सकता था।
घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और सख्त निगरानी की कितनी जरूरत है। यदि निर्माण के दौरान मानकों का पालन नहीं किया जाएगा, तो इस तरह के हादसे भविष्य में भी होते रहेंगे।
फिलहाल घायल मजदूर का इलाज जारी है और उसकी स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है। वहीं, ग्रामीणों का गुस्सा अब भी शांत नहीं हुआ है और वे न्याय की मांग पर अड़े हुए हैं।
कुल मिलाकर दानापुर के ढिबरा में हुआ यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम में मौजूद खामियों और लापरवाही की एक बड़ी चेतावनी है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो ऐसे हादसे आगे भी दोहराए जा सकते हैं, जिसकी कीमत मासूम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी।

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