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ईद पर खानकाहों में पहुंचे मुख्यमंत्री, मोहब्बत और भाईचारे का दिया संदेश; गांधी मैदान से दूरी पर उठीं चर्चाएं

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पटना। ईद-उल-फितर के मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस बार एक अलग अंदाज में नजर आए। पारंपरिक तौर पर गांधी मैदान में नमाज में शामिल होने की बजाय उन्होंने राजधानी के विभिन्न खानकाहों का दौरा कर इबादत की और सूफी परंपरा के जरिए आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश दिया। उनके इस कदम को जहां एक ओर धार्मिक सौहार्द का प्रतीक माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर उनकी गैरमौजूदगी को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
ईद के इस खास दिन की शुरुआत मुख्यमंत्री ने खानकाह मुजीबिया पहुंचकर की। यहां उन्होंने सज्जादा नशीं हजरत सैयद शाह आयतुल्ला कादरी से मुलाकात की और उनसे दुआएं लीं। इस दौरान उन्होंने सभी प्रदेशवासियों को ईद की बधाई दी और राज्य में अमन-चैन तथा खुशहाली की कामना की। खानकाह परिसर में मौजूद लोगों ने भी मुख्यमंत्री का स्वागत किया और इस मौके को खास बताया।
इसके बाद मुख्यमंत्री पटना सिटी के खानकाह मुनएमिया पहुंचे। यहां उन्होंने सज्जादा नशीं हजरत सैयद शाह शमीमुद्दीन अहमद मुनअमी के साथ मिलकर राज्य की सुख-शांति और समृद्धि के लिए दुआ मांगी। इस दौरान खानकाह परिसर में धार्मिक वातावरण देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
मुख्यमंत्री का अगला पड़ाव मित्तन घाट स्थित खानकाह बारगाहे इश्क रहा। यहां उन्होंने सज्जादा नशीं सैयद शाह ख्वाजा आमिर शाहिद सहित अन्य लोगों से मुलाकात की और उन्हें ईद की मुबारकबाद दी। इस दौरान मुख्यमंत्री पारंपरिक तरीके से इबादत करते नजर आए और लोगों के साथ बैठकर सेवइयां और सूखे मेवों का भी स्वाद लिया। उनके इस सादगीपूर्ण अंदाज ने वहां मौजूद लोगों का दिल जीत लिया।
ईद के मौके पर मुख्यमंत्री ने पहले ही एक संदेश जारी कर प्रदेश और देशवासियों, खासकर मुस्लिम समुदाय को शुभकामनाएं दी थीं। उन्होंने कहा कि रमजान के पाक महीने में की गई इबादत समाज में शांति और भाईचारे को मजबूत करती है। उन्होंने यह भी कामना की कि ईद का यह पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए।
हालांकि, इस बार मुख्यमंत्री का गांधी मैदान में नमाज में शामिल न होना चर्चा का विषय बन गया। वर्ष 2005 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से नीतीश कुमार लगभग हर साल ईद के मौके पर गांधी मैदान पहुंचते रहे हैं और नमाजियों के बीच उपस्थित रहते थे। लेकिन इस बार उनकी अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में कई तरह के सवाल खड़े कर दिए।
मुख्यमंत्री की जगह इस बार उनके पुत्र निशांत कुमार गांधी मैदान पहुंचे। वे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कार्यक्रम में शामिल हुए और लोगों का अभिवादन किया। उनकी मौजूदगी को लेकर लोगों में खासा उत्सुकता देखी गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना भविष्य की राजनीति के संकेत भी दे सकती है।
गांधी मैदान में हजारों नमाजियों ने एक साथ नमाज अदा की और ईद की खुशियां मनाईं। इस दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। हर प्रवेश द्वार पर पुलिस बल की तैनाती रही और पूरे कार्यक्रम की निगरानी की जा रही थी।
मुख्यमंत्री के इस दौरे के दौरान कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी भी उनके साथ मौजूद रहे। इनमें अशोक चौधरी, संजय कुमार झा, श्याम रजक, संजय कुमार सिंह के अलावा जिला प्रशासन के अधिकारी भी शामिल थे। पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम और वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के शर्मा भी इस दौरान मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री के खानकाहों के इस दौरे को सूफी परंपरा के प्रति सम्मान और सामाजिक एकता के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। बिहार जैसे विविधता वाले राज्य में इस तरह के कदम सामाजिक समरसता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
कुल मिलाकर, इस बार की ईद पर मुख्यमंत्री का यह अलग अंदाज चर्चा का केंद्र बना रहा। एक ओर उन्होंने धार्मिक स्थलों पर जाकर भाईचारे का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर गांधी मैदान से उनकी दूरी और बेटे की मौजूदगी ने सियासी गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले समय में इसका क्या असर पड़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

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