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फरसा वाले बाबा की संदिग्ध मौत के बाद बवाल, आगरा-दिल्ली हाईवे चार घंटे जाम; पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प, कई घायल

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गोतस्करों पर हत्या का आरोप लगाकर समर्थकों का उग्र प्रदर्शन, पथराव और तोड़फोड़ से हालात बेकाबू; पुलिस ने 24 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया

आगरा-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर शनिवार सुबह उस समय हालात पूरी तरह बेकाबू हो गए, जब “फरसा वाले बाबा” के नाम से प्रसिद्ध संत चंद्रशेखर दास महाराज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद उनके समर्थकों ने हाईवे जाम कर दिया। यह विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे हिंसक रूप लेता गया और करीब चार घंटे तक पूरे इलाके में अफरा-तफरी, तनाव और अराजकता का माहौल बना रहा।

बताया जा रहा है कि तड़के करीब चार बजे कोसीकलां क्षेत्र में एक तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से बाबा की मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी में इसे सड़क दुर्घटना बताया गया, लेकिन मौके पर मौजूद गोसेवकों और बाबा के अनुयायियों ने इस घटना को सामान्य हादसा मानने से इनकार कर दिया। उनका आरोप था कि यह एक सुनियोजित हत्या है, जिसमें कथित गोतस्करों का हाथ हो सकता है।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी करने लगी। हालांकि, बाबा के समर्थक इससे संतुष्ट नहीं हुए और वे शव को एंबुलेंस के जरिए अपने गांव आजनौख ले गए। जैसे-जैसे यह खबर आसपास के गांवों में फैली, बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होने लगे।

सुबह होते-होते स्थिति और गंभीर हो गई। आक्रोशित समर्थकों ने बाबा के शव को एक वाहन में रखकर छाता कस्बे के पास आगरा-दिल्ली हाईवे पर पहुंच गए। करीब सात बजे उन्होंने सड़क के बीचों-बीच शव रखकर जाम लगा दिया और गोतस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे।

हाईवे जाम होते ही दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। यात्री बसें, निजी वाहन और यहां तक कि एंबुलेंस भी इस जाम में फंस गईं। धीरे-धीरे लोगों की संख्या बढ़ती गई और प्रदर्शन उग्र होता चला गया।

मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों—एडीएम प्रशासन, एसपी सिटी और एसपी ग्रामीण—ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ किसी भी हालत में पीछे हटने को तैयार नहीं थी। बातचीत के दौरान ही पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई, जिसने जल्द ही हिंसक रूप ले लिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुस्साई भीड़ ने अचानक हाईवे से गुजर रहे वाहनों पर पथराव शुरू कर दिया। कई गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए और कुछ वाहनों को गंभीर नुकसान पहुंचा। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अधिकारियों को अपनी सुरक्षा के लिए इधर-उधर भागना पड़ा।

इस दौरान पुलिसकर्मियों को भी निशाना बनाया गया। छाता थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। भीड़ ने कुछ पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट भी की। बताया जा रहा है कि करीब दो दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी इस झड़प में घायल हुए।

सिर्फ पुलिस ही नहीं, बल्कि रास्ते से गुजर रहे आम नागरिक और सैलानी भी इस हिंसा का शिकार बने। कई लोगों को भीड़ ने पीट दिया, जिससे इलाके में भय का माहौल बन गया।

स्थिति पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। चूंकि उस समय गोवर्धन क्षेत्र में वीवीआईपी ड्यूटी और ईद के मद्देनजर भारी संख्या में पुलिस बल पहले से तैनात था, इसलिए शुरुआती समय में मौके पर पर्याप्त फोर्स उपलब्ध नहीं हो पाई। इसी कारण भीड़ को नियंत्रित करने में देरी हुई और हालात बिगड़ते चले गए।

करीब साढ़े दस बजे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी डीआईजी स्तर के अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की। उनके साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।

कुछ देर शांत रहने के बाद करीब 11 बजे एक बार फिर भीड़ उग्र हो गई और दोबारा पथराव शुरू कर दिया। इससे माहौल फिर तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सख्ती बरतनी शुरू की और उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले दागे।

पुलिस की इस कार्रवाई के बाद धीरे-धीरे भीड़ तितर-बितर होने लगी और करीब साढ़े 11 बजे तक हाईवे से जाम हटाया जा सका। इसके बाद यातायात को सामान्य करने की प्रक्रिया शुरू हुई और फंसे हुए वाहनों को धीरे-धीरे निकाला गया।

पूरे घटनाक्रम के दौरान करीब चार घंटे तक हाईवे पूरी तरह बाधित रहा, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

इधर, प्रशासन ने इस हिंसक प्रदर्शन को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने मौके पर मौजूद वीडियो फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान की है। शाम तक 24 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया और उनसे पूछताछ की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जो भी लोग कानून व्यवस्था बिगाड़ने, पथराव करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी ओर, बाबा चंद्रशेखर दास महाराज का अंतिम संस्कार दोपहर बाद उनके गांव आजनौख में कर दिया गया। अंतिम संस्कार के दौरान भी बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे, हालांकि वहां माहौल अपेक्षाकृत शांत रहा।

फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बाबा की मौत वास्तव में एक सड़क दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई साजिश थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही इस रहस्य से पर्दा उठ सकेगा।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अफवाहों और आशंकाओं के आधार पर भीड़ का उग्र हो जाना किस हद तक खतरनाक हो सकता है। समय रहते नियंत्रण न होने पर ऐसी घटनाएं बड़े संकट का रूप ले सकती हैं, जैसा कि इस मामले में देखने को मिला।

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